वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने ‘लंका जमीन’ विवाद को लेकर किसानों को कानूनी मदद का भरोसा दिलाया
ताडेपल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पमिदिमुक्काला मंडल के लंकापल्ली गांव के किसानों ने यहां पार्टी के सेंट्रल ऑफिस में वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की। उन्होंने लगभग 600 एकड़ 'लंका जमीन' से जुड़े विवाद पर उनसे समर्थन मांगा।
किसानों ने वाईएस जगन को बताया कि उनके परिवार 1952 से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय टीडीपी नेताओं और रेवेन्यू अधिकारियों ने टीडीपी नेताओं और उनके बेनामी लोगों के नाम पर पट्टादार पासबुक जारी की है। उन्होंने दावा किया कि पमिदिमुक्कला के तहसीलदार के. नवीन कुमार ने इस प्रक्रिया की देखरेख की थी।
उन्होंने वाईएसआरसीपी से अपील की कि वह इस मामले की पूरी जांच की मांग करे और न्याय मिलने तक उनके साथ खड़ी रहे।
उनकी शिकायतें सुनने के बाद वाईएस जगन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी जरूरी कानूनी मदद देगी और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में उनका साथ देगी।
मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक काइले अनिल कुमार ने कहा कि पमर्रु में टीडीपी नेता री-सर्वे, जाली दस्तावेजों और ऐसे नामों पर जारी पट्टादार पासबुक के जरिए एससी सोसाइटी लंका की लगभग 350 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो असली रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं हैं।
प्रभावित किसानों के साथ जगन मोहन रेड्डी से मिलने के बाद उन्होंने सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
अनिल ने कहा कि पमर्रु में कुल 1,200 एकड़ जमीन है, जिसमें से असली किसान लगभग 250 एकड़ पर खेती करते हैं, जबकि बाकी 350 एकड़ जमीन स्थानीय नेता घंटा सुरेश की देखरेख और विधायक वरला कुमार राजा के समर्थन से दूसरों को ट्रांसफर की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एससी सोसाइटी की 600 एकड़ जमीन को भी सरकारी जमीन के तौर पर दिखाया जा रहा है, जिसमें रेत निकालने के लिए प्रस्तावित लगभग 100 एकड़ जमीन भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि जमीन, रेत और मिट्टी के सौदों के जरिए लगभग 300 करोड़ रुपए के सरकारी संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि वाईएसआरसीपी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी और गैर-कानूनी पासबुक को रद्द करने और न्यायिक जांच की मांग करेगी।
--आईएएनएस
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