Aapka Rajasthan

इटली ने दूसरे विश्व युद्ध के विक्टोरिया क्रॉस विजेता भारतीय सैनिक को किया याद

रोम, 19 सितंबर (आईएएनएस)। इटली की मोंटोने नगरपालिका और भारतीय दूतावास ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में इटली में लड़े भारतीय सैनिक और विक्टोरिया क्रॉस प्राप्तकर्ता नायक यशवंत घाडगे को संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि दी।
 

रोम, 19 सितंबर (आईएएनएस)। इटली की मोंटोने नगरपालिका और भारतीय दूतावास ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में इटली में लड़े भारतीय सैनिक और विक्टोरिया क्रॉस प्राप्तकर्ता नायक यशवंत घाडगे को संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि दी।

दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इटली की मोंटोने नगरपालिका और दूतावास ने संयुक्त रूप से विक्टोरिया क्रॉस प्राप्तकर्ता नायक यशवंत घाडगे को श्रद्धांजलि दी, जो द्वितीय विश्व युद्ध में इटली में लड़े थे। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत में बेलगावी के आर्मी पब्लिक स्कूल और इटली के मोंटोने के ज्यूसेपे पोलिडोरी सेकेंडरी स्कूल के छात्रों के बीच वर्चुअल बातचीत थी।"

इसमें कहा गया, "इस आदान-प्रदान से भारतीय और इतालवी बच्चों को उनकी वीरता और बलिदान के बारे में जानने, अनुभव साझा करने और सीमाओं से परे जुड़ने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम हमारे साझा इतिहास और दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को उजागर करने के लिए दूतावास के प्रयासों का हिस्सा है।"

नायक यशवंत घाडगे ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 3/5वीं मराठा लाइट इन्फैंट्री (अब मराठा लाइट इन्फैंट्री) में सेवा दी थी। उन्होंने 10 जुलाई 1944 को इटली की अपर टाइबर वैली के मोर्लूपो में अकेले ही एक दुश्मन चौकी पर कब्जा कर लिया और इस दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उस समय उनकी उम्र केवल 24 वर्ष थी।

लंदन स्थित नेशनल आर्मी म्यूजियम के अनुसार, उनके वीरता पुरस्कार के प्रशस्ति-पत्र में लिखा है, “बिना किसी हिचकिचाहट के और यह अच्छी तरह जानते हुए कि उनके साथ जाने के लिए कोई सैनिक नहीं बचा है, नायक यशवंत घाडगे मशीन गन चौकी की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने सबसे पहले एक ग्रेनेड फेंका, जिससे मशीन गन और उसे चला रहा सैनिक निष्क्रिय हो गया। इसके बाद उन्होंने अपनी टॉमी गन से मशीन गन दल के एक सदस्य को गोली मार दी। अंत में, मैगजीन बदलने का समय न होने के कारण उन्होंने अपनी बंदूक को बैरल से पकड़ा और मशीन गन दल के बचे हुए दो सैनिकों को पीट-पीटकर मार डाला। दुर्भाग्य से, दुश्मन के स्नाइपरों ने नायक यशवंत घाडगे की छाती और पीठ में गोली मार दी और उनकी उसी चौकी पर मृत्यु हो गई, जिस पर उन्होंने अकेले कब्जा किया था। ऐसी परिस्थिति में, जब उन्हें अपने जीवित बचने की उम्मीद बेहद कम होने का पूरा एहसास था, इस भारतीय एनसीओ द्वारा दिखाया गया साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्य के प्रति समर्पण असाधारण था।”

नायक यशवंत घाडगे का शव कभी बरामद नहीं हो सका। इटली के कैसिनो वॉर मेमोरियल पर उनकी स्मृति में उनका नाम अंकित है। भारत में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के माणगांव स्थित तहसील कार्यालय में उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम