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दुर्गा पूजा का उद्घाटन राजनेताओं के बजाय सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों द्वारा करवाना बेहतर: दिलीप घोष

कोलकाता, 13 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को कहा कि स्वयं एक राजनेता होने के बावजूद उनका मानना है कि दुर्गा पूजा का उद्घाटन राजनेताओं के बजाय सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तियों द्वारा कराया जाना चाहिए।
 

कोलकाता, 13 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को कहा कि स्वयं एक राजनेता होने के बावजूद उनका मानना है कि दुर्गा पूजा का उद्घाटन राजनेताओं के बजाय सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तियों द्वारा कराया जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के राज्य नेतृत्व ने पार्टी नेताओं को सही सलाह दी है कि वे दुर्गा पूजा समितियों के मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप करने के तृणमूल कांग्रेस के तरीके से बचें और इसके बजाय मामलों को समिति के सदस्यों पर छोड़ दें।

उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी समुदाय के दुर्गा पूजा के उद्घाटन समारोह में नहीं जाएंगे, खासकर उन समारोहों में जो किसी राजनीतिक व्यक्ति से जुड़े हों।

दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगता है कि दुर्गा पूजा का उद्घाटन राजनीतिक हस्तियों के बजाय सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से सफल व्यक्तियों द्वारा किया जाना हमेशा बेहतर होता है।

दिलीप घोष ने कहा, "मेरे विचार से पद्म पुरस्कार विजेता दुर्गा पूजा का उद्घाटन करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होंगे। किसी विशेष राजनीतिक निष्ठा से रहित उपलब्धि हासिल करने वाले लोग पूजा का उद्घाटन करने के लिए सबसे अच्छे होते हैं। साथ ही, साधु-संतों जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक व्यक्तित्वों को भी उद्घाटन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, कई ऐसे अज्ञात और गुमनाम व्यक्तित्व भी हैं जो दूरदराज के क्षेत्रों में जन कल्याण के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। पूजा समितियां इन लोगों को भी शामिल कर सकती हैं और उनके द्वारा पूजा का उद्घाटन करवाकर उन्हें प्रसिद्धि दिला सकती हैं, क्योंकि वे समाज के लिए वास्तविक आदर्श हैं।"

घोष ने पूजा के उद्घाटन में प्रख्यात खेल हस्तियों को शामिल करने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान सत्ताधारी दल के नेताओं पर अक्सर विभिन्न सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों पर एकाधिकार करने का आरोप लगाया जाता था, जिसमें पूर्व मंत्रिमंडल के प्रभावशाली सदस्य एक ही समय में कई पूजा समितियों को नियंत्रित करते थे।

उन्होंने भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधियों को यह भी सलाह दी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा समितियों के साथ अपने संबंधों को सीमित रखें।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी