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ईरानी विदेश मंत्री ने यूके को दी नसीहत, 'अमेरिका की सैन्य मदद न करें आप'

तेहरान, 1 अगस्त (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटेन को चेतावनी भरे अंदाज में नसीहत दी है कि वह ईरान पर हमले करने में अमेरिका के साथ किसी भी तरह का सैन्य सहयोग न करे।
 

तेहरान, 1 अगस्त (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटेन को चेतावनी भरे अंदाज में नसीहत दी है कि वह ईरान पर हमले करने में अमेरिका के साथ किसी भी तरह का सैन्य सहयोग न करे।

शनिवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अराघची ने ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि "आक्रामक देशों" के साथ कोई भी सहयोग, जिसमें मौजूदा रक्षा समझौतों के तहत किया गया सहयोग भी शामिल है "स्वीकार्य नहीं" होगा।

अराघची ने ईरान के प्रति ब्रिटिश सरकार की "अनुचित और गलत" नीतियों की आलोचना की। उन्होंने लंदन द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताने और हाल के महीनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ थोपे गए दो संघर्षों में उसकी "मिलीभगत" का हवाला दिया। उन्होंने ब्रिटेन से तेहरान के प्रति अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और 'आक्रामक परिभाषा के लिए कन्वेंशन' के तहत, किसी देश के क्षेत्र और सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ गैर-कानूनी हमलों के लिए करने की अनुमति देना आक्रामकता है और इससे हमले का शिकार हुए देश को आत्मरक्षा का अधिकार मिलता है।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि ईरान ने अच्छी नीयत से अमेरिका के साथ राजनयिक प्रक्रिया शुरू की थी और जून में वाशिंगटन के साथ संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन वाशिंगटन अपने वादों को पूरा करने में विफल रहा।

उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को मैनेज करने के लिए ओमान संग परिचालन तंत्र स्थापित करने के ईरान के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और चेतावनी दी कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से मामला और अधिक जटिल हो जाएगा।

वहीं, मिलिबैंड ने कहा कि उनका देश ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं है और इस बात पर जोर दिया कि विवादों को सुलझाने का तरीका कूटनीति ही है।

पिछले महीने, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान से संबंधित अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के अमेरिकी इस्तेमाल को जारी रखने की मंजूरी दी, जिससे उनके पूर्ववर्ती द्वारा स्थापित नीति बरकरार रही।

28 फरवरी को, अमेरिका और इजरायल ने तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए। ईरान ने जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों और संपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी, साथ ही होर्मुज पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर दिया।

--आईएएनएस

केआर/