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होर्मुज स्‍ट्रेट खोलने और बातचीत शुरू करने के लिए ईरान ने अमेरिका को दिया प्रस्ताव: र‍िपोर्ट

वॉशिंगटन, 25 सितंबर (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान ने ट्रंप प्रशासन को एक प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और बड़े स्तर पर चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए सात दिनों के भीतर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई है।
 

वॉशिंगटन, 25 सितंबर (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान ने ट्रंप प्रशासन को एक प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत होर्मुज स्‍ट्रेट को दोबारा खोलने और बड़े स्तर पर चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए सात दिनों के भीतर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई है।

द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, अराघची ने कहा कि यह प्रस्ताव इस हफ्ते मध्यस्थों के जरिए हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचाया गया। इस पर प्रतिक्रिया के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया, लेकिन उनकी ओर से तुरंत कोई जवाब नहीं आया।

यह प्रस्ताव महीनों से जारी संघर्ष के बाद कूटनीतिक बातचीत की एक नई शुरुआत बन सकता है। इस संघर्ष की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। आमतौर पर दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है।

अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में इस प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईरान की शर्तें काफी हद तक उस समझौता ज्ञापन (एमओयू) जैसी हैं, जिस पर दोनों देश जून में सहमत हुए थे।

अराघची ने कहा क‍ि हमने जो शर्तें रखी हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि यह प्रस्ताव युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप प्रशासन की शर्तों को पूरा करता है या नहीं।

तेहरान ने जून में बनी सहमति का मतलब यह निकाला था कि इसमें होर्मुज स्‍ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता दी गई है। हालांकि, अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगी इस रुख को खारिज करते रहे हैं।

र‍िपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाईं और जहाजों को चेतावनी दी कि वे तेहरान के साथ तालमेल किए बिना वहां से गुजरने की कोशिश न करें।

इसके बाद इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई और दुनियाभर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ने में भी इसका असर पड़ा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के साथ इस कूटनीतिक संपर्क की बात स्वीकार की।

ट्रंप ने कहा कि ईरान संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते पर पहुंच सकता है या फिर उसे 'पूरी तरह खत्म होने' का सामना करना पड़ सकता है। उनके भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हॉल से बाहर चले गए।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को बाहरी खतरों से खुद को बचाने के लिए पर्याप्त ताकत की जरूरत है।

पेजेश्‍क‍ियन ने कहा, "ईरान को ताकतवर होना चाहिए, ताकि उसे धमकाया न जा सके और उसके भविष्य को खतरे में न डाला जा सके।"

उन्होंने आगे कहा क‍ि हम बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन ताकत के दम पर बात मनवाने की भाषा स्वीकार नहीं करेंगे।

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका, इजरायल के साथ युद्ध में इसलिए शामिल हुआ ताकि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सके।

वहीं, पेजेशकियन ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान को 'शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक' विकसित करने का अधिकार है। ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर विवाद किसी समझौते तक पहुंचने में अब भी सबसे बड़ी रुकावटों में से एक है।

वॉशिंगटन ऐसी पुख्ता व्यवस्था चाहता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश को शांतिपूर्ण और नागरिक जरूरतों वाला परमाणु कार्यक्रम चलाने की इजाजत मिलनी चाहिए।

--आईएएनएस

एवाई/एएस