डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भड़का ईरान, अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा
संयुक्त राष्ट्र, 14 जनवरी (आईएएनएस)। हिंसा की हर कोने में फैलती चिंगारी के कारण ईरान मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। इसी बीच, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अबुकर दाहिर उस्मान को एक पत्र लिखा है, जिसमें अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए गए।
ईरान ने अमेरिका पर हिंसा को भड़काने और देश के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी देने के आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र का रुख किया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वे अमेरिका की ओर से हिंसा भड़काने और बल प्रयोग की धमकी देने की निंदा करें।
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें। अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें। मदद आ रही है।"
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि राजनयिक जुड़ाव रोकने का फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा से जुड़ा है। उन्होंने कहा, "जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएं बंद नहीं हो जातीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।"
यह घोषणा उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यावसायिक लेन-देन पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।
उन्होंने जिन्हें 'ईरानी देशभक्त' कहा, उन्हें संबोधित करते हुए उनसे विरोध जारी रखने और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का दस्तावेजीकरण करने का आग्रह किया। ट्रंप ने कहा, "सभी ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें। अगर संभव हो तो अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें और हत्यारों व दुर्व्यवहार करने वालों के नाम सुरक्षित रखें।"
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में मौतों की रिपोर्ट अलग-अलग हैं, लेकिन जोर दिया कि जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा, "मैं पांच अलग-अलग संख्याएं सुन रहा हूं। एक मौत भी बहुत ज्यादा है।" उन्होंने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को चेतावनी दी कि इसके परिणाम होंगे।
इससे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को एक बयान दिया कि ईरान से निपटने के लिए अमेरिका की प्राथमिकता अब भी कूटनीति ही है, हालांकि ट्रंप प्रशासन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों को भी इनकार नहीं करेगा।
--आईएएनएस
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