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2030 तक भारत के वाटर सेक्टर में 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारत में वर्ष 2030 तक पानी की मांग उपलब्ध जल आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है, और इस चुनौती से निपटने के लिए अगले दशक में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की संभावना है। यह जानकारी पीएल कैपिटल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
 

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारत में वर्ष 2030 तक पानी की मांग उपलब्ध जल आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है, और इस चुनौती से निपटने के लिए अगले दशक में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की संभावना है। यह जानकारी पीएल कैपिटल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह निवेश मुख्य रूप से जल शोधन (वाट ट्रीटमेंट), अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण (वेस्टवाटर रिसायक्लिंग) और सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी का घर है, लेकिन उसके पास वैश्विक मीठे पानी के केवल 4 प्रतिशत संसाधन हैं।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण, भू-जल के अत्यधिक दोहन और कृषि में बढ़ती पानी की खपत के कारण देश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।

इसी वजह से अब जल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है और इसके लिए जल शोधन, वितरण, भंडारण और पुनर्चक्रण जैसी परियोजनाओं में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

पीएल कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर (एडवाइजरी) विक्रम कसाट ने कहा कि अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के विपरीत जल क्षेत्र में निवेश आर्थिक चक्र पर निर्भर नहीं है।

उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा से जुड़ा निवेश दीर्घकालिक, नीतिगत और टिकाऊ विकास के लिए अनिवार्य है।

उनके अनुसार, बढ़ते शहरीकरण, उद्योगों के विस्तार और पर्यावरणीय मानकों के कड़े होने से जल शुद्धिकरण, जल पुनर्चक्रण, समुद्री जल को मीठा बनाने और पुन: उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं में लंबे समय तक मजबूत मांग बनी रहेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की कई प्रमुख योजनाएं जल क्षेत्र में निवेश को गति दे रही हैं, जिनमें जल जीवन मिशन, अमृत 2.0 और नमामि गंगे कार्यक्रम जैसी पहले शामिल हैं।

इसके अलावा, जल शक्ति मंत्रालय के बजट में बढ़ते आवंटन से स्वच्छ पेयजल, बेहतर सीवरेज व्यवस्था और अपशिष्ट जल शोधन परियोजनाओं को मजबूती मिल रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे जल क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट सबसे बड़ा निवेश अवसर बनकर उभर रहा है।

देश में प्रतिदिन 72,000 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज उत्पन्न होता है, लेकिन इसकी तुलना में उपचार की क्षमता काफी कम है। इस कारण बड़ी मात्रा में बिना शोधन किया गया गंदा पानी सीधे पर्यावरण में छोड़ा जा रहा है।

रिपोर्ट का मानना है कि इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर अंतर को दूर करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अपशिष्ट जल पुन: उपयोग परियोजनाओं में भारी निवेश होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे उभरते उद्योगों के विस्तार से अत्यधिक शुद्ध (अल्ट्रा-प्योर) औद्योगिक जल की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिससे जल शोधन और पुनर्चक्रण उद्योग के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी