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अक्टूबर में भारत की कारोबारी गतिविधियां 4 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची, घरेलू और निर्यात मांग से मिली मजबूती: पीएमआई डेटा

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। अक्टूबर में भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों (बिजनेस एक्टिविटी) में जोरदार तेजी दर्ज की गई और यह चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। एचएसबीसी द्वारा जारी फ्लैश पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) आंकड़ों के अनुसार, घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से मिले मजबूत ऑर्डरों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों को गति दी है। साथ ही महंगाई से जुड़े दबावों में भी नरमी देखने को मिली है।
 

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। अक्टूबर में भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों (बिजनेस एक्टिविटी) में जोरदार तेजी दर्ज की गई और यह चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। एचएसबीसी द्वारा जारी फ्लैश पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) आंकड़ों के अनुसार, घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से मिले मजबूत ऑर्डरों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों को गति दी है। साथ ही महंगाई से जुड़े दबावों में भी नरमी देखने को मिली है।

एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स, जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की संयुक्त गतिविधियों को मापता है, सितंबर के 55.9 से बढ़कर अक्टूबर में 56.7 पर पहुंच गया। 50 से ऊपर का स्तर आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत माना जाता है। यह जून के बाद कारोबारी गतिविधियों की सबसे तेज वृद्धि है।

आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने बाजार की स्थितियों में सुधार और नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी की जानकारी दी। विदेशी मांग भी मजबूत रही और निर्यात ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डरों की वृद्धि सितंबर के स्तर के आसपास बनी रही, लेकिन इसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्यात मांग में आई तेजी रही। उन्होंने कहा कि जून 2025 के बाद पहली बार निर्यात ऑर्डरों में इतनी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है।

उन्होंने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए निर्माताओं ने कच्चे माल और तैयार माल दोनों का भंडारण बढ़ाया है। इसके साथ ही उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य पर पड़ने वाला दबाव भी लगातार कम हो रहा है, जो महंगाई के मोर्चे पर राहत का संकेत है।

हालांकि रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर कुछ मिश्रित रही। निजी क्षेत्र में रोजगार वृद्धि की गति धीमी पड़ी और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने लगातार नौ महीनों तक कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बाद इस बार नए कर्मचारियों की भर्ती लगभग रोक दी। दूसरी ओर विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ा, लेकिन यह वृद्धि सीमित रही।

कई कंपनियों का मानना है कि मौजूदा स्टाफ स्तर फिलहाल काम के दबाव को संभालने के लिए पर्याप्त है, इसलिए बड़े पैमाने पर नई नियुक्तियों की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबित कार्यभार (बैकलॉग) में लगातार तीसरी बार गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले साढ़े छह वर्षों में संयुक्त रूप से सबसे तेज रही, जो इस बात का संकेत है कि कंपनियां काम को पहले की तुलना में अधिक कुशलता से पूरा कर रही हैं।

इसके अलावा, एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अक्टूबर में 54.9 दर्ज किया गया, जो विनिर्माण गतिविधियों में लगातार विस्तार को दर्शाता है।

--आईएएनएस

डीबीपी