भारत के कृषि और जल क्षेत्र के डीपटेक इकोसिस्टम को स्टार्टअप्स के विस्तार के प्रयासों से मिल रही गति: नैसकॉम
नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। आईटी इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था नैसकॉम (नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज) ने शुक्रवार को कहा कि भारत का कृषि और जल प्रबंधन क्षेत्र से जुड़ा डीपटेक इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसमें स्टार्टअप की बढ़ती संख्या अब पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक विस्तार और कारोबार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित 'डीपटेक कॉन्फ्लुएंस 2026' कार्यक्रम में इस रुझान को रेखांकित करते हुए नैसकॉम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु तकनीकों से संचालित नवाचार देश के कृषि और जल क्षेत्रों में चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्केलेबल समाधानों की तलाश कर रहे उद्यमों, निवेशकों और नीति निर्माताओं का तेजी से ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा कि कृषि और जल प्रबंधन ऐसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां डीपटेक तकनीकें आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा, "भारत में ऐसे उद्यमियों की मजबूत आधारशिला मौजूद है, जो एआई, आईओटी, जैव प्रौद्योगिकी, मटेरियल साइंस, सेंसर तकनीक, ऑटोमेशन और जलवायु तकनीकों को मिलाकर नए समाधान विकसित कर रहे हैं।"
संगीता गुप्ता ने कहा कि डीपटेक कॉन्फ्लुएंस के माध्यम से नैसकॉम स्टार्टअप्स को बेहतर बाजार पहुंच, उद्योगों के साथ जुड़ाव और तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के अवसर उपलब्ध करा रहा है।
इस कार्यक्रम में नैसकॉम डीपटेक क्लब के 20 सप्ताह के विकास कार्यक्रम 'डीटीसी एक्सेलेरेट' से जुड़े 12 नवोन्मेषी स्टार्टअप्स ने अपने समाधान प्रस्तुत किए, जिसका उद्देश्य डीपटेक स्टार्टअप्स को पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर बड़े स्तर पर उद्योगों में लागू करने योग्य बनाना है।
डीपटेक कॉन्फ्लुएंस ने बाजार तक पहुंच, उद्योगों द्वारा तकनीक अपनाने, निवेश की तैयारी, पायलट परियोजनाओं को बड़े स्तर पर विस्तार देने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत का कृषि और जल क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, स्थिरता संबंधी चिंताओं, सीमित संसाधनों और उत्पादन क्षमता को बनाए रखने की बढ़ती जरूरत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कृषि तकनीक (एग्रीटेक) और जल तकनीक (वॉटरटेक) क्षेत्र में नवाचार तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कई स्टार्टअप्स अभी भी अपनी तकनीकों को पायलट स्तर से आगे बड़े पैमाने पर लागू करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
नैसकॉम ने कहा कि डीपटेक कॉन्फ्लुएंस का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। इसके तहत नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को उद्योगों, निवेशकों, सरकारी एजेंसियों और क्रियान्वयन भागीदारों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी तकनीकों का वास्तविक दुनिया में उपयोग और विस्तार संभव हो सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
