Aapka Rajasthan

भारत नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में मदद जारी रखेगा: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद चल रहे राहत और बचाव कार्यों में मदद करने के अपने वादे को दोहराया। भारत ने कहा कि वह जमीनी जरूरतों के हिसाब से मदद देना जारी रखेगा।
 

नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद चल रहे राहत और बचाव कार्यों में मदद करने के अपने वादे को दोहराया। भारत ने कहा कि वह जमीनी जरूरतों के हिसाब से मदद देना जारी रखेगा।

नई दिल्ली में हर दो हफ्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ने अब तक सात विमानों से 95 टन राहत सामग्री भेजी है और नेपाल के राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें तैनात की हैं।

जायसवाल ने कहा कि हमने नेपाल के लोगों और सरकार के साथ एकजुटता और सहानुभूति जताई है, और हम इस आपदा में उनकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। एक करीबी दोस्त और पड़ोसी होने के नाते, भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है और नेपाल के राहत, बचाव और पुनर्निर्माण के प्रयासों में मदद करना जारी रखेगा। हमने सात विमानों से 95 टन राहत सामग्री भेजी है, और कुछ और सामग्री जल्द ही वहां भेजी जाएगी। हमारी फोरेंसिक टीम और टनल रेस्क्यू टीम, दोनों ही टीमें मौके पर काम कर रही हैं। वे बचाव और राहत कार्यों में मदद कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि फोरेंसिक टीम अभी काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में काम कर रही है, जहां वे 1200 डीएनए नमूनों पर काम कर रहे हैं। हम नेपाल की जरूरत के हिसाब से उनकी मदद करना जारी रखेंगे। जैसा कि मैंने पिछली बार बताया था, इस आपदा में 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। अब तक 169 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। और जिन 275 लापता भारतीय नागरिकों का मैंने जिक्र किया, उनमें वे 49 लोग भी शामिल हैं जो चीन की तरफ लापता हो गए थे।

जायसवाल ने आगे कहा कि भारत सरकार आपदा के बाद से ही भारतीय नागरिकों को सक्रिय रूप से मदद पहुंचा रही है। उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए भारत, बीजिंग और काठमांडू में चौबीसों घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।

नेपाल के रसुवा में आई भीषण बाढ़ की शुरुआत 26 अगस्त को चीन के तिब्बत इलाके से हुई थी। यह बाढ़ सीमा पार बहने वाली भोटे कोशी नदी से होकर गुजरी, जिससे विदेशी नागरिकों समेत एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और हिमालयी देश में बड़े पैमाने पर तबाही मची।

--आईएएनएस

एमएस/