भारत प्रशांत क्षेत्र को साझा हिंद-प्रशांत का अभिन्न हिस्सा मानता है: एमओएस मार्गेरिटा
कोरोर (पलाऊ), 1 सितंबर (आईएएनएस)। प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों पर जोर देते हुए विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मंगलवार को कहा कि यह क्षेत्र नई दिल्ली की व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पलाऊ के कोरोर में आयोजित 55वें प्रशांत द्वीप समूह फोरम (पीआईएफ) के नेताओं की बैठक के ‘डायलॉग पार्टनर सेशन’ को संबोधित करते हुए मार्गेरिटा ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत प्रशांत देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। इसमें फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के साथ भारत का जुड़ाव भी शामिल है।
उन्होंने कहा, “भारत ‘ब्लू पैसिफिक कॉन्टिनेंट’ के साथ अपनी साझेदारी को सर्वोच्च महत्व देता है। हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंधों, फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के साथ हमारे जुड़ाव के माध्यम से इस साझेदारी को और गहराई मिली है।”
मार्गेरिटा ने कहा, “हम प्रशांत क्षेत्र को किसी दूरस्थ क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि हमारे साझा हिंद-प्रशांत का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, भारत प्रशांत द्वीपीय देशों को बड़े महासागरीय राष्ट्रों के रूप में देखता है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन हमेशा से पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की भावना पर आधारित रहा है। यही एकजुटता और साझा उद्देश्य की भावना शिखर सम्मेलन की थीम ‘बी.ई.एल.ए.यू -बिल्डिंग इकोनॉमीज: लाइफ. एक्शन. यूनिटी’ में भी दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि यह थीम हिंद-प्रशांत को लेकर भारत की उस दृष्टि से मेल खाती है, जिसमें क्षेत्र को स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देखा गया है। यह दृष्टि अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, वैध व्यापार तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है।
मार्गेरिटा ने कहा, “अपनी हिंद-प्रशांत दृष्टि को ठोस रूप देने के लिए भारत ने 2019 में इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य खुले और स्वतंत्र समुद्री क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से साझा हितों को आगे बढ़ाना है। साथ ही, महासागरों के स्वास्थ्य को बनाए रखना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।”
उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत का जुड़ाव अब ठोस परिणामों में बदल रहा है। वर्ष 2023 में पापुआ न्यू गिनी में आयोजित तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, डिजिटल क्षमता निर्माण, जल और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में कई व्यापक पहलों की घोषणा की थी।
मार्गेरिटा ने कहा कि नई दिल्ली इन पहलों को जमीन पर ठोस परिणामों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए द्विपक्षीय विकास सहयोग के साथ-साथ इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड के माध्यम से मांग आधारित परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर की चुनौती प्रशांत देशों के लिए “मौजूदा और अस्तित्व से जुड़ी चिंताएं” हैं और भारत भी इस आकलन को साझा करता है।
उन्होंने कहा, “हम इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (जीबीए) जैसी पहलों के माध्यम से अपना योगदान दे रहे हैं। भारत सदस्य देशों को इन पहलों से जुड़ने और अधिक लचीले तथा टिकाऊ भविष्य के लिए मिलकर काम करने का आमंत्रण देता है।”
विदेश राज्य मंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) के क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रयासों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इनमें शुरुआती चेतावनी प्रणाली, आपदा से निपटने की तैयारी, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा और समय पर मानवीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है।
मार्गेरिटा ने कहा कि व्यापक ग्लोबल साउथ में प्रशांत क्षेत्र की आवाज महत्वपूर्ण है। भारत प्रशांत देशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता रहेगा कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्राथमिकताओं और चिंताओं को उचित स्थान मिले।
उन्होंने कहा, “हमारे तीन ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ में पीआईएफ के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही है। इन सम्मेलनों ने आपके विचारों और प्राथमिकताओं को सामने रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।”
--आईएएनएस
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