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भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा: जयशंकर

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट बड़ी संभावनाओं वाला एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे फायदेमंद बाजारों में से एक में बाजार तक पहुंच बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिल सकता है।
 

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट बड़ी संभावनाओं वाला एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे फायदेमंद बाजारों में से एक में बाजार तक पहुंच बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा मिल सकता है।

जयशंकर यहां 'इंडिया एंड द वर्ल्ड: अडैप्टिव बाय डिजाइन' थीम पर आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल ट्रेड सिस्टम में सभी समस्याओं के लिए वाशिंगटन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि बाजार में कई गड़बड़ियां अमेरिका के अलावा अन्य स्रोतों से भी पैदा हुई हैं और उनका निष्पक्ष रूप से आकलन करने की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत का प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार है और हाल ही में यूरोपीय संघ, यूके और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के व्यापारिक संबंधों में बेहतर संतुलन लाने में मदद मिलेगी।

जयशंकर ने आगे कहा कि भारत के पिछले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट मुख्य रूप से आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया पर केंद्रित थे, इसलिए नई दिल्ली के लिए अधिक पारदर्शी और परिपक्व बाजारों और अधिक क्रय शक्ति वाली अर्थव्यवस्थाओं की ओर विविधता लाना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को मजबूत या बेहतर किया है। यह 'मल्टी-अलाइनमेंट' (कई देशों के साथ तालमेल बिठाने) के दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शामिल अवसरों और चुनौतियों के आधार पर कई संबंधों को आगे बढ़ाना है।

मंत्री ने कहा कि हर रिश्ता भारत के लिए कुल मिलाकर फायदेमंद है और किसी एक पार्टनर के साथ आगे बढ़ने से देश के लिए दूसरे मोर्चों पर अपने हितों को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि भारत आम लोगों के जहाजों पर हमलों को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' मानता है। चाहे वे हमले ब्लैक सी, रेड सी या खाड़ी क्षेत्र में हों। साथ ही, उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन विवाद को सुलझाने का रास्ता बातचीत और कूटनीति ही है।

--आईएएनएस

एमएस/