Aapka Rajasthan

पिछले 10 सालों में 460 सैटेलाइट्स के साथ भारत का स्पेस सेक्टर नई ऊंचाइयों पर: हरदीप पुरी

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को कहा कि 100 लॉन्च और ऑर्बिट में 548 सैटेलाइट्स के ऐतिहासिक माइलस्टोन के साथ, भारत का स्पेस सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
 

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को कहा कि 100 लॉन्च और ऑर्बिट में 548 सैटेलाइट्स के ऐतिहासिक माइलस्टोन के साथ, भारत का स्पेस सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

मंत्री ने कहा कि नेशनल स्पेस डे पर, हम स्पेस सेक्टर में भारत की शानदार प्रगति का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए हैं। चंद्रयान-1 और मंगलयान से लेकर चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 तक, भारत का स्पेस प्रोग्राम हमारी वैज्ञानिक उत्कृष्टता, महत्वाकांक्षा और इनोवेशन की भावना को दर्शाता है।

पुरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के प्रतिभाशाली युवाओं की ऊर्जा और इनोवेशन इस यात्रा को नई गति दे रहे हैं। स्पेस स्टार्टअप्स और प्राइवेट सेक्टर के इनोवेटर्स भारत की स्पेस महत्वाकांक्षाओं के लिए साहसी विचारों को नई संभावनाओं में बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहे हैं, हमारा स्पेस प्रोग्राम तकनीकी रूप से एडवांस्ड और आत्मनिर्भर भारत को आकार देने में एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभर रहा है।

23 अगस्त, 2023 को इसरो ने चंद्रयान-3 स्पेसक्राफ्ट को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक लैंड कराया, जिससे भारत अमेरिका, चीन और पूर्व सोवियत संघ के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया। भारत ने चंद्रमा के ऊबड़-खाबड़ दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने वाला पहला देश बनने का गौरव भी हासिल किया।

पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस एक साल बाद, 23 अगस्त 2024 को मनाया गया। इस दिन का मकसद न सिर्फ चंद्रयान-3 की कामयाबी को याद करना था, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धियों का जश्न मनाना भी था।

14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए लॉन्च किए गए चंद्रयान-3 को तीन अहम क्षमताएं दिखाने के लिए डिजाइन किया गया था: चांद पर सुरक्षित और आराम से उतरना (सॉफ्ट लैंडिंग), चांद की सतह पर रोवर का घूमना और सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करना।

लैंडिंग के बाद, प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर से बाहर निकला और लैंडर पर लगे उपकरणों के साथ मिलकर प्रयोग करने लगा। इस अध्ययन में चांद की सतह का तापमान, भूकंपीय गतिविधियां, प्लाज्मा का माहौल और तत्वों की बनावट जैसी चीजें शामिल थीं, जिससे वैज्ञानिकों को चांद की सतह के उस हिस्से को करीब से जानने का मौका मिला, जिसके बारे में पहले जानकारी नहीं थी।

इसरो अपने मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने में पूरी तरह सफल रहा, क्योंकि लैंडर और रोवर एक चंद्र दिवस (जो पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर होता है) तक काम करते रहे, जिसके लिए उन्हें डिजाइन किया गया था।

--आईएएनएस

एमएस/