एआई की दौड़ के बीच भारत ने दिखाई मजबूती, निवेश और विकास के नए अवसर उभर रहे हैं: एचएसबीसी के अर्थशास्त्री
नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर बढ़ती निवेश होड़ और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक मजबूती दिखाई है। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कहानी एआई के कारण पीछे छूटने की नहीं, बल्कि लचीलेपन, अवसरों और निरंतर विकास की कहानी है।
रिपोर्ट में एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने कहा, "हाल के वर्षों में एआई क्षेत्र में निवेश का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों और सीमित क्षेत्रों की ओर गया है, जिससे वैश्विक पूंजी प्रवाह का संतुलन प्रभावित हुआ। इसके चलते निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ी कि एआई हार्डवेयर क्षेत्र में सीमित उपस्थिति और सेवाओं के निर्यात पर संभावित दबाव भारत की विकास संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अब इन धारणाओं पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।"
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अब तक इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से कुछ समय के लिए आर्थिक गतिविधियों पर दबाव जरूर पड़ा, लेकिन इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की है। भारत ने ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से नियंत्रित किया है और चालू खाते का घाटा पहले जैसी स्थितियों की तुलना में अनियंत्रित नहीं हुआ।
एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने कहा, "इस मजबूती की एक प्रमुख वजह सेवाओं का निर्यात है, जो लगातार मजबूत बना हुआ है। अब तक समग्र स्तर पर एआई के कारण सेवा निर्यात पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है। इसके विपरीत सेवाओं का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और वार्षिक आधार पर अब वस्तु निर्यात के स्तर के करीब पहुंच गया है।"
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी क्षेत्र में ऋण वृद्धि और कॉर्पोरेट राजस्व वृद्धि में फिर से तेजी आई है। वाहन बिक्री मजबूत बनी हुई है और सरकार का बुनियादी ढांचे पर खर्च भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे घरेलू आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है।
निर्यात प्रदर्शन को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा वर्तमान में एआई हार्डवेयर से संचालित हो रहा है, जबकि भारत इस क्षेत्र का प्रमुख खिलाड़ी नहीं है। इसके बावजूद भारतीय निर्यात में सुधार यह संकेत देता है कि देश धीरे-धीरे वैश्विक बाजार हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।
वस्तु निर्यात में महामारी के दौरान आई तेजी के बाद कुछ वर्षों तक स्थिरता रही, लेकिन हाल के महीनों में इसमें फिर से गति देखने को मिली है। दूसरी ओर सेवा निर्यात लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है।
एचएसबीसी का मानना है कि एआई के कारण भारत के सेवा क्षेत्र को नुकसान होने की आशंका बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह सच है कि कॉल सेंटर जैसे कुछ पारंपरिक कार्यों में एआई-आधारित बॉट मानव श्रमिकों की जगह ले सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही एआई भारतीय पेशेवरों की उत्पादकता बढ़ाकर नए अवसर भी पैदा करेगा। इससे ऐसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी जहां पहले भारतीय कार्यबल को चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
घरेलू स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज होती ऋण वृद्धि भविष्य में निवेश खर्च बढ़ने का संकेत देती है। विशेष रूप से निजी कंपनियों द्वारा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में बढ़ोतरी की संभावना दिखाई दे रही है।
एचएसबीसी के अनुसार, विस्तृत आंकड़े बताते हैं कि बड़ी कंपनियों को दिए जा रहे कॉर्पोरेट ऋणों में तेजी आई है। आमतौर पर ऐसी कंपनियां बड़े निवेश और अवसंरचना परियोजनाओं में धन लगाती हैं, इसलिए यह प्रवृत्ति भविष्य की आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
--आईएएनएस
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