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भारत को एफसीएनआर (बी) के पुनर्भुगतान की चिंता करने की आवश्यकता नहीं: नीलकांत मिश्रा, विश्व बैंक

मुंबई, 4 सितंबर (आईएएनएस)। भारत को आने वाले पांच वर्षों में परिपक्व होने वाले विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) या एफसीएनआर (बी) जमा के पुनर्भुगतान को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह उपकरण पूंजी का अपेक्षाकृत सस्ता स्रोत है। यह बयान विश्व बैंक में भारत के लिए कार्यकारी निदेशक नीलकांत मिश्रा ने दिया।
 

मुंबई, 4 सितंबर (आईएएनएस)। भारत को आने वाले पांच वर्षों में परिपक्व होने वाले विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) या एफसीएनआर (बी) जमा के पुनर्भुगतान को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह उपकरण पूंजी का अपेक्षाकृत सस्ता स्रोत है। यह बयान विश्व बैंक में भारत के लिए कार्यकारी निदेशक नीलकांत मिश्रा ने दिया।

एनडीटीवी प्रॉफिट के साथ एक इंटरव्यू में मिश्रा ने कहा कि भारत को एफसीएनआर (बी) के तहत पूंजी 6.5–7 प्रतिशत की ब्याज पर मिल रही है, जो "काफी सस्ती" है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर जमा परिपक्व होने के समय हालात मुश्किल बने रहते हैं, तो देश एक और एफसीएनआर (बी) जारी कर सकता है।

भारत की खास यूएसडी-आईएनआर फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत 136.4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई (31 अगस्त, 2026 तक), जिसमें एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट का हिस्सा 93 प्रतिशत था।

मिश्रा ने बताया कि एफसीएनआर (बी) होल्डिंग्स 127.2 अरब डॉलर थीं, जबकि विदेशी मुद्रा में विदेश से लिए गए कर्ज का हिस्सा 5.26 अरब डॉलर और बाहरी कमर्शियल कर्ज का हिस्सा 3.89 अरब डॉलर था।

उन्होंने कहा कि पैसा चाहे एफडीआई, पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट या किसी और जरिए से आए, "आने वाला हर एक डॉलर एक देनदारी है।"

उन्होंने कहा कि भारत के चालू खाता घाटे को देश की आर्थिक कमजोरी के संकेत के बजाय बचत और निवेश के बीच के अंतर के तौर पर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "जब चालू खाता घाटा होता है, तो आप पर देनदारी आती है। इसलिए या तो आप अपनी संपत्ति बेच रहे होते हैं... या फिर आप कर्ज ले रहे होते हैं।" यह कर्ज विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, प्राइवेट इक्विटी निवेश, बाहरी कमर्शियल कर्ज (ईसीबी) और भारतीय बॉन्ड खरीदने वाले विदेशी निवेशकों के रूप में हो सकता है।

उन्होंने कहा कि बाहरी कर्ज की स्थिति या जीडीपी के मुकाबले बाहरी कर्ज के नजरिए से देखें तो भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है और तेजी से बढ़ रही है।

मिश्रा ने बताया कि देश के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि विदेशी पूंजी का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एबीएस