भारत में मानसून से ज्यादा अहम हो गई हैं कच्चे तेल की कीमतें, निर्भरता कम करना जरूरी : जयंत सिन्हा
नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। भारत को तेल पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी और नवीकरणीय ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। इसकी वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की तेजी से तेल आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल असर पड़ता है और इससे उत्पादन लागत बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में महंगाई का दबाव बढ़ जाता है। यह जानकारी एवरस्टोन ग्रुप के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा की ओर से रविवार को दी गई।
एनडीटीवी प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवॉर्ड्स कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को तय करने में तेल की कीमतों की भूमिका मानसून से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने वित्त मंत्रालय में प्रचलित एक मशहूर जोक का हवाला देते हुए कहा, "पहले कहा जाता था कि भारत के वित्त मंत्री मानसून हैं। अब कहा जा सकता है कि भारत के वित्त मंत्री तेल की कीमतें हैं।"
सिन्हा ने कहा कि कई वर्षों तक भारत की आर्थिक सेहत का प्रमुख निर्धारक मानसून को माना जाता था, लेकिन आज उसकी जगह काफी हद तक वैश्विक तेल कीमतों ने ले ली है।
उनका यह ऐसे समय में आई है जब इस वर्ष भारत में मानसून की बारिश उम्मीद से कम रही है, वहीं मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इससे महंगाई का जोखिम बढ़ा है और यह स्पष्ट हुआ है कि तेल की कीमतों का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से हो रहे बदलावों के दौर में भारत को दीर्घकालिक वैश्विक रुझानों के अनुरूप खुद को तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां मानसून कृषि विकास को गति देता है, खाद्य महंगाई को नियंत्रित करता है और ग्रामीण उपभोक्ता मांग को बढ़ावा देता है, वहीं वैश्विक तेल कीमतें सीधे तौर पर महंगाई, परिवहन लागत और लगभग सभी वस्तुओं की विनिर्माण लागत को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को चीन पर अपनी निर्भरता भी कम करनी चाहिए और भविष्य की आर्थिक वृद्धि को दिशा देने वाले प्रमुख निवेश क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
सिन्हा ने कहा कि दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए भारत को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 40 प्रतिशत तक निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखना चाहिए। सिन्हा के अनुसार, जैसे-जैसे भारत प्रमुख वैश्विक आर्थिक और निवेश रुझानों के साथ आगे बढ़ेगा, उच्च निवेश दर बेहद महत्वपूर्ण होगी।
एनडीटीवी प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवॉर्ड्स का आयोजन भारत के प्रमुख उद्योगपतियों, कंपनियों और उद्यमियों को सम्मानित करने के लिए किया जा रहा है। ये पुरस्कार नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को दिए जाते हैं।
इन पुरस्कारों का चयन एक स्वतंत्र जूरी करेगी, जिसकी अध्यक्षता भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक एवं चेयरमैन सुनील भारती मित्तल करेंगे। 12 श्रेणियों में दिए जाने वाले इन पुरस्कारों के विजेताओं का चयन दो-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
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