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भारत को वित्त वर्ष 27 में मजबूत एफसीएनआर रिस्पॉन्स के चलते 95 अरब डॉलर तक का पूंजी प्रवाह मिलने की संभावना: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। मजबूत फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) एफसीएनआर (बी) इनफ्लो और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 90-95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आने की उम्मीद है। इससे भारत का भुगतान संतुलन (बीओपी) 64 अरब डॉलर के सरप्लस में पहुंच सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। मजबूत फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) एफसीएनआर (बी) इनफ्लो और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 90-95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आने की उम्मीद है। इससे भारत का भुगतान संतुलन (बीओपी) 64 अरब डॉलर के सरप्लस में पहुंच सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने एफसीएनआर (बी) प्रवाह का अनुमान बढ़ाकर करीब 80 अरब डॉलर कर दिया है। इसके अलावा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा में बाहरी स्रोतों से आने वाले प्रवाह के 10-15 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है।

इसके परिणामस्वरूप, भारत के पूंजी खाते का सरप्लस अब बढ़कर करीब 108 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह महज 2 अरब डॉलर था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत का बीओपी 64 अरब डॉलर के सरप्लस में रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में 23.6 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025 में 5 अरब डॉलर का घाटा रहा था।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, "यह भारत की बाहरी स्थिति में महत्वपूर्ण मजबूती को दर्शाएगा और वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।"

5 जून 2026 को घोषित अन्य नीतिगत उपायों के साथ एफसीएनआर (बी) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी (ओएफसीबी) के लिए रियायती स्वैप विंडो को निवेशकों से मजबूत रिस्पॉन्स मिला है।

एजेंसी ने बताया कि इन उपायों के जरिए 5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच कुल 40.8 अरब डॉलर आकर्षित हुए हैं। इनमें एफसीएनआर (बी) प्रवाह 36.7 अरब डॉलर रहा, जबकि ईसीबी और ओएफसीबी ने मिलकर 4.1 अरब डॉलर का योगदान दिया।

वर्तमान में बड़े बैंक एफसीएनआर जमा पर 6.0-6.5 प्रतिशत की ब्याज दर दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक करीब 7 प्रतिशत तक की दर की पेशकश कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत पूंजी प्रवाह से घरेलू तरलता की स्थिति में सुधार हो सकता है। जुलाई में बैंकिंग प्रणाली की तरलता औसतन करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए रही थी, जो अगस्त में अब तक बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इसमें महीने के अंत में आने वाले पूंजी प्रवाह का भी समर्थन मिला है।

--आईएएनएस

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