भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी स्थिर रहने की संभावना: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। भारत में घर खरीदना अब पहले जितना मुश्किल नहीं रहेगा। गुरुवार को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती आय और सरकार की सहायक नीतियों के चलते प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों का असर संतुलित हो सकता है।
सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 से 2028 के बीच भारत में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी (घर खरीदने की क्षमता) स्थिर रहने की संभावना है। इससे उन लोगों को राहत मिल सकती है जो पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती कीमतों और महंगे होम लोन के कारण परेशान थे।
रिपोर्ट 'इंडिया रेसिडेंसियल मार्केट आउटलुक 2026' में कहा गया है कि 2021 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब लोगों की आय प्रॉपर्टी की कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।
इस बदलाव से होम लोन की ईएमआई का बोझ कम होगा और ज्यादा लोग घर खरीदने में सक्षम हो सकेंगे।
रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे छह बड़े शहरों में ईएमआई और आय के अनुपात का विश्लेषण किया गया है, जिसमें 2021 से 2028 तक के आंकड़े शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी लगातार खराब हुई, क्योंकि प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ब्याज दरें भी ऊंची रहीं, जबकि लोगों की आय उतनी तेजी से नहीं बढ़ी।
लेकिन अब यह ट्रेंड बदलने की उम्मीद है। 2026 के बाद ईएमआई और आय का अनुपात स्थिर हो जाएगा, जिससे घर खरीदना आसान हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के रियल एस्टेट बाजार के लिए एक अहम मोड़ है। कम होती ब्याज दरें, धीमी कीमतों की बढ़ोतरी और बढ़ती आय मिलकर हाउसिंग डिमांड को मजबूत करेंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक भारत के अपर-मिडिल इनकम देश बनने की दिशा में बढ़ने से हाउसिंग सेक्टर को और मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, 2025 में रियल एस्टेट बाजार मजबूत रहा, जहां नए प्रोजेक्ट लॉन्च और बिक्री दोनों 2.7 लाख यूनिट से ज्यादा रही।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अब लोग प्रीमियम और लग्जरी घरों की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी रही और इस सेगमेंट में बिक्री पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है।
--आईएएनएस
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