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स्वतंत्र वैश्विक साझेदारियां बनाने के लिए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता अहम, जेजीयू में बोले दिल्ली के उपराज्यपाल

सोनीपत, 3 नवंबर (आईएएनएस) दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता स्वतंत्र वैश्विक साझेदारियां बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
 

सोनीपत, 3 नवंबर (आईएएनएस) दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता स्वतंत्र वैश्विक साझेदारियां बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘बदलती भू-राजनीति में भारत की भूमिका’ विषय पर आयोजित एक विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम भू-राजनीतिक बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय संघर्षों और आर्थिक एवं संसाधन सुरक्षा को लेकर बढ़ती होड़ के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नए सिरे से आकार ले रही है। देश अपनी साझेदारियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। वे अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रहे हैं और इस बदलते माहौल में विश्वसनीय आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारों की तलाश कर रहे हैं।"

सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा, "हमारे पास एक बड़ी अर्थव्यवस्था का व्यापक आकार, युवा राष्ट्र की जनसांख्यिकीय ताकत, बढ़ती तकनीकी क्षमताएं और वैश्विक शक्ति के विभिन्न केंद्रों के साथ स्थापित संबंध हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे पास उन देशों के साथ भी जुड़ने की क्षमता है, जो जरूरी नहीं कि एक-दूसरे से सहमत हों। भारत की विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों की पूर्ति से निर्देशित रही है। रणनीतिक स्वायत्तता हमें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करने, साझेदारियां विकसित करने और अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता देती है।"

उन्होंने आगे कहा, "विशेष रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की साझेदारियां किसी एक देश या समूह तक सीमित नहीं हैं। हम अमेरिका, यूरोप, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ जुड़ते हैं। इससे ऐसे समय में भारत को विशिष्ट कूटनीतिक पहुंच मिलती है, जब अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिक जटिल होते जा रहे हैं। विभिन्न पक्षों के साथ सार्थक जुड़ाव बनाए रखने की क्षमता अपने आप में एक रणनीतिक संपत्ति है।"

उपराज्यपाल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस महत्व को और बढ़ा दिया है। संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान विभिन्न महाद्वीपों के देशों को प्रभावित कर रहे हैं। दुनिया ऐसे भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिरता में योगदान दे सकें, आर्थिक अवसर उपलब्ध करा सकें और भू-राजनीतिक व्यवधानों के परिणामों से निपटने में मदद कर सकें। भारत के पास बड़ी भूमिका निभाने की क्षमता और विश्वसनीयता दोनों हैं।

उन्होंने कहा, "संकट के दौर में यह विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है, जब देशों के बीच संवाद करना अधिक कठिन हो जाता है। विभिन्न भू-राजनीतिक समूहों के साथ संबंध बनाए रखने की भारत की क्षमता जुड़ाव के नए अवसर पैदा कर सकती है, हमारे हितों की रक्षा कर सकती है और व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में योगदान दे सकती है।"

उन्होंने आगे कहा, "अंततः भारत का भू-राजनीतिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपनी ताकत को क्षमताओं में कितनी प्रभावी ढंग से बदलते हैं। हमें शिक्षा, अनुसंधान, बुनियादी ढांचे, रक्षा, विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी में लगातार निवेश करने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के साथ भारत के संबंध भी एक महत्वपूर्ण आयाम हैं। कई विकासशील देश किफायती तकनीक, विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे में निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच की तलाश कर रहे हैं। भारत अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, प्रौद्योगिकी साझेदारियों को बढ़ावा दे सकता है और केवल सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उनकी क्षमताओं के विकास में मदद कर सकता है। ऐसा करते हुए भारत प्रमुख शक्तियों के साथ अपने जुड़ाव और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी विश्वसनीयता का लाभ उठा सकता है।

उपराज्यपाल ने कहा, "भारत को इस अवसर का सामना महत्वाकांक्षा, आत्मविश्वास और अपने राष्ट्रीय हितों की स्पष्ट समझ के साथ करना चाहिए। हमारी भूमिका केवल दूसरों के फैसलों के अनुसार खुद को ढालने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हमें उन नियमों, संस्थानों, प्रौद्योगिकियों और आर्थिक साझेदारियों को आकार देने में भाग लेना चाहिए, जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को परिभाषित करेंगे। भारत के सामने अवसर केवल उभरती वैश्विक व्यवस्था में अपना स्थान तलाशने का नहीं है, बल्कि उस दुनिया को आकार देने में योगदान देने का है।"

उपराज्यपाल का स्वागत करते हुए ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति प्रो. (डॉ.) सी. राज कुमार ने कहा, "हम सरदार तरनजीत सिंह संधू का स्वागत करते हुए बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इसकी वजह केवल यह नहीं है कि वह दिल्ली के उपराज्यपाल के प्रतिष्ठित पद पर हैं, बल्कि यह भी है कि उन्होंने आज की भू-राजनीति को आकार लेते हुए देखा है और उसमें एक सक्रिय भागीदार एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"

उन्होंने कहा कि संधू एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक विचारक हैं, जिन्होंने भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी के रूप में वैश्विक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में विशिष्ट सेवाएं दी हैं।

उन्होंने कहा कि संधू को दुनिया भर के समाजों को समझने और अमेरिका सहित कई देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने का व्यापक अनुभव है। भारत-अमेरिका संबंधों की शुरुआती मजबूती और उनके विकास की नींव रखने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वास्तव में, इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर में मुख्य अतिथि के नेतृत्व के कारण ही भारत-अमेरिका संबंध काफी हद तक संभव हो पाए।

कुलपति ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की परिकल्पना से शुरू होने वाले पहले ‘वर्ल्ड आइडियाज फोरम 2027’ की शुरुआत की घोषणा भी की।

उन्होंने कहा, "हमारा दृष्टिकोण अब ऐसे विचारों और अवधारणाओं के क्षेत्र में नेतृत्व करने का है, जो भविष्य को आकार दे सकें। ग्लोबल साउथ केवल विचारों का उपभोक्ता क्यों बना रहे, जबकि वह खुद भी विचार पैदा कर सकता है? दुनिया के हर देश के साथ साझेदारी और सहयोग जरूरी है, लेकिन भारत और व्यापक ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करते हुए हमारे लिए विचारों के सृजन और नेताओं को एक मंच पर लाकर नए विचार विकसित करने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना महत्वपूर्ण है।"

फ्रांस में भारत के पूर्व राजदूत और भारतीय विदेश सेवा के पूर्व राजनयिक डॉ. मोहन कुमार, जो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं डीन (स्ट्रैटेजिक एंड ऑफिस ऑफ द वाइस चांसलर) तथा डिप्लोमैटिक प्रैक्टिस के प्रोफेसर हैं, ने विशिष्ट वक्ता का परिचय दिया। उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में राजनयिक के रूप में उपराज्यपाल के कार्यकाल और अनुभवों को भी याद किया।

ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ रिसर्च प्रो. (डॉ.) अर्पिता गुप्ता ने विश्वविद्यालय में अनुसंधान के माहौल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में उच्च गुणवत्ता वाले शोध दस्तावेज वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त और विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाने वाली पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

प्रश्न-उत्तर सत्र का संचालन एडजंक्ट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस प्रो. अम्बरीन खान ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ भारत के भविष्य और भू-राजनीति पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम का समापन ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. दबिरू श्रीधर पटनायक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

--आईएएनएस

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