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फोर्स लेबर के खिलाफ की कार्रवाई में अमेरिका ने भारत पर अन्य देशों के मुकाबले लगाया कम टैरिफ

वॉशिंगटन, 24 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई में भारत पर 10 प्रतिशत का अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगाया जाएगा।
 

वॉशिंगटन, 24 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई में भारत पर 10 प्रतिशत का अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगाया जाएगा।

अमेरिका ने कहा है कि जांच के दौरान भारत ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की व्यवस्था अपनाई है। इसी वजह से भारत को उन देशों की तुलना में अधिक अनुकूल श्रेणी में रखा गया है, जिन पर अधिक टैरिफ लगाया गया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (एसएसटीआर) ने गुरुवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर 60 अर्थव्यवस्थाओं से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने फोर्स लेबर से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने या उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है।

ये नए शुल्क 24 जुलाई से प्रभावी होंगे और संबंधित देशों की फोर्स लेबर आयात नीति के आधार पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक होंगे।

भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिन पर 10 प्रतिशत का कम टैरिफ लागू होगा। इस सूची में बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम भी शामिल हैं।

यूएसटीआर के अनुसार, जून में प्रस्तावित कार्रवाई प्रकाशित होने के बाद भारत ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया, जिसके चलते उसे कम टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप मानते हैं कि दशकों की नैतिक अपील के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से फोर्स लेबर समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका लगभग एक सदी से ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू कर रहा है और उसका सख्ती से पालन भी कराता है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा करें।"

उन्होंने कहा, "आज की कार्रवाई मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में विकृति दोनों को दूर करने की दिशा में एक कदम है, जिससे दुनिया भर के श्रमिकों का कल्याण बेहतर होगा। जिन देशों ने तेजी से फोर्स लेबर आयात प्रतिबंध अपनाए हैं, उनसे हम इनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी उम्मीद करते हैं।"

यह कार्रवाई 12 मार्च को शुरू की गई उन जांचों का निष्कर्ष है, जिनमें 60 अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा की गई थी। अमेरिका का आरोप था कि इन देशों ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने या उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई।

इस प्रक्रिया के दौरान दो चरणों में सार्वजनिक सुनवाई हुई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया गया और 2,100 से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त हुईं एवं 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

यूएसटीआर ने 2 जून को निष्कर्ष निकाला कि सभी 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियां और व्यवहार "अनुचित" हैं तथा वे अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इस कारण इनके खिलाफ 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

भारत के अलावा कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास, श्रीलंका तथा त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भी जांच शुरू होने के बाद फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया। वहीं जॉर्डन ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत ऐसे कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

दूसरी ओर, जांच के दायरे में शामिल अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं, जिनमें चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, पर 12.5 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाएगा।

यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान के लिए अलग व्यवस्था लागू होगी, जिसमें मौजूदा मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) शुल्क दरों को समायोजित करके टैरिफ तय किया जाएगा।

यूएसटीआर ने कुछ उत्पादों को इस कार्रवाई से छूट भी दी है। इनमें चुनिंदा कच्चा माल, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं, दवाएं, सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण और ऐसे अन्य उत्पाद शामिल हैं, जिन पर टैरिफ लगाने से आर्थिक व्यवधान पैदा हो सकता है या नीति का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

एजेंसी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया के लिए अतिरिक्त टैरिफ-रेट कोटा विकसित किए जाएंगे, ताकि अमेरिकी कपास और वस्त्र सामग्री का उपयोग कर बने उत्पादों के आयात को बढ़ावा दिया जा सके।

यूएसटीआर की फैक्टशीट के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों पर लागू होगी, जो अमेरिकी आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसे राष्ट्रपति ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा बताया गया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जबरन श्रम को समाप्त करना और अन्य देशों को अमेरिका जैसी आयात प्रतिबंध व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सेक्शन 301 अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को यह अधिकार देता है कि वह उन विदेशी सरकारी नीतियों की जांच करे और उनके खिलाफ कार्रवाई करे, जिन्हें अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या बाधक माना जाता है। पहले भी इस प्रावधान का इस्तेमाल चीन सहित कई बड़े व्यापारिक विवादों में किया जा चुका है, जबकि वर्तमान प्रशासन ने इसे श्रम संबंधी व्यापारिक मामलों तक भी विस्तारित कर दिया है।

--आईएएनएस

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