डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक अग्रणी बना भारत, 24 देशों के साथ किया सहयोग समझौता
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। नागरिक-केंद्रित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और बड़े पैमाने पर विकसित डिजिटल इकोसिस्टम की बदौलत भारत ने फरवरी 2026 तक 24 देशों के साथ इंडिया स्टैक और डीपीआई प्रणाली पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा एक्सचेंज और सेवा वितरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
शनिवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में से एक का निर्माण किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक व्यापक रूप से बढ़ी है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत डिजिटल भुगतान और डिजिटल गवर्नेंस नवाचार के क्षेत्र में भी वैश्विक अग्रणी बनकर उभरा है। कई देशों में इंडिया स्टैक के विस्तार के साथ 'डिजिटल इंडिया' नागरिक-केंद्रित, समावेशी और तकनीक आधारित विकास मॉडल के जरिए भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत कर रहा है।
इसके अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों में संचालित हो रहा है, जिससे वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि आधार, डिजिलॉकर, कोविन, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), दीक्षा, उमंग और ई-संजीवनी जैसे भारतीय डिजिटल प्लेटफॉर्म अब दुनिया के कई देशों में डिजिटल प्रशासन के मॉडल के रूप में अपनाए जा रहे हैं।
भारत ने वर्ष 2023 में जी20 की अपनी अध्यक्षता के दौरान 'इंडिया स्टैक ग्लोबल' और 'ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी' की भी शुरुआत की थी, जिससे भारतीय डिजिटल समाधानों की वैश्विक पहुंच और बढ़ी।
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, 'डिजिटल इंडिया कार्यक्रम' आगामी 1 जुलाई, 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे करेगा। इस कार्यक्रम को नौ प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया था, ताकि डिजिटल पहुंच का विस्तार हो और नवाचार को बढ़ावा मिले।
फैक्टशीट में बताया गया है कि भारत अब रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। यूपीआई के माध्यम से वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान लेनदेन का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है।
इसके अलावा, देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 से 14 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो अगले एक दशक में बढ़कर करीब 20 प्रतिशत होने का अनुमान है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि डिजिटल इंडिया अभियान ने नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम और विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक के उपयोग को तेज गति दी है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को भी मजबूती मिली है।
सरकार का कहना है कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम समावेशी विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नागरिक सशक्तिकरण को निरंतर गति दे रहा है।
--आईएएनएस
डीएससी
