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भारत-ईएफटीए समझौता केवल टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं, कारोबार को देगा दीर्घकालिक स्थिरता: सरकार

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को भारतीय निर्यातकों और उद्योग संगठनों से भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल टैरिफ में कटौती का नहीं, बल्कि व्यवसायों को दीर्घकालिक स्थिरता, पूर्वानुमेयता और निवेश आधारित विकास का मजबूत आधार प्रदान करने वाला समझौता है।
 

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को भारतीय निर्यातकों और उद्योग संगठनों से भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल टैरिफ में कटौती का नहीं, बल्कि व्यवसायों को दीर्घकालिक स्थिरता, पूर्वानुमेयता और निवेश आधारित विकास का मजबूत आधार प्रदान करने वाला समझौता है।

निर्यात संवर्धन परिषदों (एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि इस समझौते ने दोनों पक्षों के बाजारों को अधिक सुलभ बनाया है और व्यापार, निवेश तथा सप्लाई चेन साझेदारी के नए अवसर पैदा किए हैं।

उन्होंने बताया कि टीईपीए 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है। इस अवसर पर ईएफटीए के सभी चार सदस्य देशों आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के वरिष्ठ प्रतिनिधि नई दिल्ली में मौजूद हैं, जहां समझौते की पहली वर्षगांठ और आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।

राजेश अग्रवाल के अनुसार, ईएफटीए देशों ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को लाभ मिलेगा। गैर-कृषि उत्पादों को तो लगभग पूर्ण बाजार पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

दूसरी ओर, भारत ने 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर प्रतिबद्धताएं दी हैं, जो ईएफटीए देशों के 95.3 प्रतिशत निर्यात को कवर करती हैं।

उन्होंने कहा कि इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू व्यापारिक पूर्वानुमेयता है। उन्होंने बताया कि टैरिफ संरचना लंबे समय तक स्थिर रहने से कारोबारी समूह आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकेंगे, सप्लाई चेन विकसित कर सकेंगे और दीर्घकालिक योजनाएं बना सकेंगे।

अग्रवाल ने भारतीय कंपनियों से अपील की कि वे ईएफटीए देशों की कंपनियों के साथ मिलकर एकीकृत मूल्य शृंखलाएं विकसित करें, जो कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक फैली हों। इससे दोनों पक्षों की प्रतिस्पर्धात्मकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, "यदि आप इस बाजार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना सकते हैं, तो आप दुनिया के किसी भी बाजार के लिए तैयार हैं।"

वाणिज्य सचिव ने कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण अवसरों की ओर संकेत किया। उन्होंने बताया कि ईएफटीए देशों ने कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को शून्य कर दिया है, जिससे भारतीय कृषि निर्यातकों को बड़े अवसर मिल सकते हैं।

समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 10 वर्षों में भारत में 50 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। साथ ही, इसके तहत अगले 15 वर्षों में देश में 10 लाख रोजगार के अवसरों के सृजन का लक्ष्य रखा गया है।

--आईएएनएस

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