भारत ने बच्चों और स्कूलों पर बढ़ते हमलों को ‘मानवता का घातक फैसला’ बताया, यूएन में की कार्रवाई की मांग
संयुक्त राष्ट्र, 25 जून (आईएएनएस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में बच्चों और हथियारों से जुड़े संघर्ष में स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। भारत ने संघर्ष वाले इलाकों में फंसे बच्चों की बुरी हालत को इंसानियत की सामूहिक नाकामी का एक भयानक फैसला बताया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार (लोकल टाइम) को बच्चों और हथियारों से जुड़े संघर्षों पर बहस हुई, जिसमें भारत ने हिस्सा लिया। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिध पी. हरीश ने कहा, "जवाबदेही के बिना (बच्चों और स्कूलों की) सुरक्षा अधूरी है। जो लोग बिना किसी सजा के स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि बच्चों और हथियारों से जुड़ी लड़ाई को लेकर महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट से पता चला है कि एक ही साल (2025) में स्कूलों पर हमले 44 फीसदी तक बढ़ गए हैं।"
उन्होंने बताया, "दुनिया भर में लगभग 473 मिलियन बच्चे, छह में से एक से ज्यादा, संघर्ष वाले इलाकों में रहते हैं या वहां से भाग रहे हैं और उनमें से 85 मिलियन से ज्यादा बच्चों को बिल्कुल भी शिक्षा नहीं मिल पा रही है।"
उन्होंने कहा, “ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वैश्विक समुदाय अपने संकल्पों को धरातल पर उतारने में नाकाम रहा है।”
पी. हरीश ने कहा कि स्कूली शिक्षा के लिए भारत का डिजिटल प्लेटफॉर्म, दीक्षा (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग), संघर्ष वाले इलाकों में या बेघर हुए बच्चों को पढ़ाने के लिए एक मॉडल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि दीक्षा ने कई भाषाओं में इंटरैक्टिव कंटेंट और एआई-पावर्ड टूल्स के जरिए अच्छी गुणवत्ता में शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाया है।
उन्होंने कहा, "हमारे अनुभव ने हमें यकीन दिलाया है कि डिजिटल लर्निंग तक पहुंच वह पुल बन सकती है जो बच्चों को संघर्षों के दौरान शिक्षा पाने में मदद करती है।"
हरीश ने कहा कि भारत का मानना है कि युद्ध का सबसे बड़ा बोझ उठाने वाले लोगों के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। इसी सोच के तहत भारत ने अपने पड़ोसी देशों से आए शरणार्थियों और विस्थापित समुदायों की शिक्षा के लिए लगातार निवेश किया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने हमारे पड़ोस सहित अलग-अलग देशों में स्कूलों और व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र बनाने सहित शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाने में निवेश किया है।
उन्होंने कहा, "लगातार सीखते रहना, मजबूती और रिकवरी के लिए सबसे ताकतवर तरीकों में से एक है।"
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कैथरीन रसेल ने ड्रोन, ऑटोनॉमस और रिमोट से चलने वाले सिस्टम और एआई समर्थित टारगेटिंग सिस्टम के बारे में चेतावनी दी, जो बच्चों और स्कूलों के लिए पहले से ही खतरनाक स्थिति को और खराब कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे युद्ध का तरीका बदल रहा है, बच्चों की सुरक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता सुनिश्चित रहनी चाहिए।"
बच्चों और आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट के लिए महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वैनेसा फ्रेजियर ने कहा कि बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन के लिए पिछला साल कम से कम 30 सालों में सबसे बुरा था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र ने बच्चों के खिलाफ 38,558 गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि की, जिनसे 24,174 बच्चे प्रभावित हुए। यह संख्या पिछले 30 वर्षों में सबसे अधिक है, जब से उनके कार्यालय को बच्चों और सशस्त्र संघर्षों पर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।
फ्रेजियर ने कहा कि 2025 में ज्यादातर सत्यापित उल्लंघन कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाके और इजरायल, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, नाइजीरिया, म्यांमार और सोमालिया में हुए।
--आईएएनएस
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