भारत और चीन सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान के लिए काम जारी रखेंगे: विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली/बीजिंग, 25 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और भारत-चीन सीमा प्रश्न पर भारत के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
बैठक के दौरान एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य, साथ ही चीनी विशेष प्रतिनिधि और केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी ने चीन-भारत सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक, गहन, मैत्रीपूर्ण और स्पष्ट चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने अपने नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, के बीच अक्टूबर 2024 में कजान और अगस्त 2025 में तियानजिन में बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने में हुई प्रगति पर ध्यान दिया।
उन्होंने लोगों के बीच आपसी संपर्क और सीमा पार आदान-प्रदान के फिर से शुरू होने पर भी संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों के बीच जारी बातचीत में चल रही कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन निर्धारित सीमा व्यापारिक दर्रों के माध्यम से सीमा व्यापार भी शामिल है।
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में और रचनात्मक व दूरदर्शी भावना के साथ, दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर स्पष्ट और गहन विचारों का आदान-प्रदान किया और अपने समग्र और दीर्घकालिक हितों के संदर्भ में सीमा प्रश्न का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए अपना काम जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।"
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, "भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।" दोनों पक्षों ने आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।
एनएसए डोभाल वांग यी के निमंत्रण पर दो दिवसीय बीजिंग दौरे पर थे। इस दौरे के दौरान उन्होंने मंगलवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इस बीच, चीनी विदेश मंत्रालय ने चीन और भारत को महत्वपूर्ण पड़ोसी और प्रमुख विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि बीजिंग आपसी समझ बढ़ाने, मतभेदों को खत्म करने, बाधाओं को दूर करने और नई दिल्ली के साथ अच्छे पड़ोसी और दोस्त बनने के लिए तैयार है।
चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा बैठक के दौरान दिए गए बयान के अनुसार, वांग यी ने कहा, "चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और प्रमुख विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि हैं। चीन-भारत संबंधों का स्वस्थ और स्थिर विकास दोनों देशों के लोगों के मौलिक हित में है, ग्लोबल साउथ के देशों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करता है और समय की प्रवृत्ति के अनुरूप है। चीन-भारत संबंध द्विपक्षीय दायरे से आगे निकल चुके हैं और वैश्विक और रणनीतिक महत्व रखते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हाल के वर्षों में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी दो बार कजान और तियानजिन में मिले, जहां वे कई महत्वपूर्ण सहमतियों पर पहुंचे, जिन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और विकास के लिए दिशा तय की है। चीन भारत के साथ मिलकर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय संबंधों को समझने, संवाद को मजबूत करने, समझ बढ़ाने, मतभेदों को खत्म करने, बाधाओं को दूर करने और अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण मित्र तथा परस्पर लाभकारी साझेदार बनने के लिए तैयार है, ताकि ड्रैगन और हाथी के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व हासिल किया जा सके।"
--आईएएनएस
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