हिमाचल: मछुआरों को सुक्खू सरकार का तोहफा, जलाशयों की मछलियों के लिए एमएसपी तय
शिमला, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की है।
सरकार की ओर से उठाए गए इस कदम का मकसद मछुआरों को कीमतों में होने वाले अचानक बदलावों से बचाना और उन्हें पक्की आमदनी का सहारा देना है। जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों के लिए मिली-जुली एमएसपी 100 रुपए प्रति किलोग्राम तय की गई है।
इसके अलावा, रविवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया कि अगर नीलामी में मछली की कीमत 100 रुपए प्रति किलोग्राम से कम हो जाती है, तो सरकार 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (डीबीटी) के जरिए 20 रुपए प्रति किलोग्राम तक की सब्सिडी देगी।
बयान में कहा गया है कि इससे मछुआरों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलेगा और काम में ज्यादा पारदर्शिता आएगी, क्योंकि सब्सिडी सीधे उन मछुआरों के बैंक खातों में जमा की जाएगी जो इसके हकदार हैं। एक और बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी की दर में भारी कटौती का ऐलान किया है।
सरकार ने पहले रॉयल्टी की दर 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दी थी और अब यह तय किया गया है कि इस वित्त वर्ष में रॉयल्टी की दर को और घटाकर सिर्फ एक प्रतिशत कर दिया जाएगा। उम्मीद है कि इस फैसले से 6 हजार से ज्यादा जलाशयी मछुआरों को सीधा फायदा होगा, क्योंकि इससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा और उनकी कुल आमदनी में काफी बढ़ोतरी होगी।
हिमाचल प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय हैं, गोविंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग बांध (कांगड़ा), रणजीत सागर और चमेरा (चंबा) और कोल बांध (बिलासपुर)। गोविंद सागर, कोल बांध, रणजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग बांध में सिंघाड़ा मछली अधिक होती है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों और निरंतर प्रयासों, जैसे कि उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) का वार्षिक भंडारण, के कारण जलाशयों में मछली उत्पादन में काफी सुधार देखने को मिला है।
जलाशयों से उत्पादन 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में एक मजबूत सकारात्मक गति को दर्शाता है।
सरकार का मानना है कि ऐसे प्रगतिशील नीतिगत उपायों से जलाशय मत्स्य पालन अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलने, टिकाऊ मत्स्य पालन प्रथाओं को बढ़ावा मिलने और जलाशय-आधारित गतिविधियों में मत्स्य पालन समुदायों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, विपणन प्रणालियों में सुधार करने और मछुआरों और मछली पालकों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करने की दिशा में भी काम कर रही है।
राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल मछली उत्पादन 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया, जो मत्स्य पालन क्षेत्र में चल रही विकास पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। यह वृद्धि ग्रामीण रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन के बढ़ते योगदान को उजागर करती है।
--आईएएनएस
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