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उमर खालिद को बिना ट्रायल वर्षों तक जेल में रखना अन्याय: वारिस पठान

मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को बिना ट्रायल के सालों तक जेल में रखना 'अन्याय' है और उन्हें अपना बचाव करने का मौका मिलना चाहिए।
 

मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को बिना ट्रायल के सालों तक जेल में रखना 'अन्याय' है और उन्हें अपना बचाव करने का मौका मिलना चाहिए।

पठान की यह प्रतिक्रिया कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख बीके हरिप्रसाद के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने जेल में बंद उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताया था और बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में छात्र एक्टिविस्ट पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की आलोचना की थी।

एआईएमआईएम नेता ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या कहा। मैं एक वकील हूं, और कानून कहता है, 'जमानत नियम है, जेल अपवाद है।' आप किसी को बिना ट्रायल के सालों तक जेल में नहीं रख सकते। यह ट्रायल से पहले ही दोषी ठहराने जैसा है। वे (खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम) छह साल से जेल में हैं। वे सरकार की नीतियों से नाखुश थे, इसलिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई।"

उन्होंने खालिद का बचाव करते हुए कहा, "कोई भी वीडियो देखकर पता लगा सकता है कि क्या उन्होंने कुछ गलत कहा था। बार-बार सुनवाई के बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है। एक वकील के तौर पर मैं कह सकता हूं कि उन्हें बिना ट्रायल के छह साल से ज्‍यादा समय तक जेल में रखना अन्याय है। ट्रायल शुरू होने दें, उन्हें कोर्ट के सामने सबूत पेश करने दें, और फैसला सुनाया जाएगा। उन्हें (खालिद को) कुछ भी साबित करने का मौका नहीं दिया जा रहा है। यह अपने आप में एक सजा है।"

पठान ने दावा किया, "कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि वह मुस्लिम हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है।"

इस बीच, एआईएमआईएम नेता ने दिशा सालियान की मौत के मामले पर भी बात की और लोगों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील की।

उन्‍होंने कहा, "इस मामले का राजनीतिकरण करने की कोई जरूरत नहीं है। यह एक ऐसे पिता की बात है जो छह साल से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब हाई कोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है और एफआईआर दर्ज की गई है। अब न्याय होना चाहिए।"

इसके अलावा, जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर के बारे में जानकारी देने पर पाकिस्तान द्वारा इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख पीकेआर करने पर वारिस पठान ने इस्लामिक रिपब्लिक को 'आतंकवाद की जड़' बताया।

उन्होंने कहा, "आतंकवाद वहीं से पनपता है। भारत ने इसकी आतंकवादी गतिविधियों का दंश झेला है। हमने पुलवामा, 26/11 और पहलगाम जैसी घटनाएं देखी हैं, जहां पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने भारत में पर्यटकों के नाम और धर्म पूछने के बाद उनकी हत्या कर दी थी। हम चाहते हैं कि सरकार 'ऑपरेशन सिंदूर' की तरह उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई करे, उन्हें यहां लाए और आतंकवाद को खत्म करने के लिए उन्हें मौत की सजा दे।"

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी