दुबई-सिंगापुर से अवैध फंडिंग के आरोप, मेगा मिलेनियम से जुड़े परिसरों की तलाशी
मुंबई, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दुबई और सिंगापुर से अवैध रूप से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के संबंध में मुंबई और दिल्ली में कार्यालयों और आवासीय संपत्तियों सहित आधा दर्जन परिसरों और महाराष्ट्र में एक फार्महाउस पर तलाशी अभियान चलाया। इस संबंध में एक अधिकारी ने शुक्रवार को जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया। ईडी ने बताया कि मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित डिजिटल उपकरणों और आपत्तिजनक दस्तावेजों की जांच के अलावा जांचकर्ताओं ने महाराष्ट्र के कर्जत में एक फार्महाउस पर भी तलाशी ली।
एक अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान ईडी को करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा, भारतीय मुद्रा और कीमती सामान भी बरामद हुआ। ईडी के बयान में कहा गया है कि तलाशी अभियान का मुख्य केंद्र मुंबई स्थित सलाहकार और कंपनी के निदेशक हरीश देधिया थे।
ईडी ने बताया कि कंपनी और उसके निदेशकों, जिनमें देधिया और उनकी पत्नी धारा देधिया शामिल हैं, को दुबई और सिंगापुर स्थित संदिग्ध कंपनियों से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई थी।
ईडी की जांच में पता चला कि देधिया ने अपने ही कर्मचारियों/फर्जी व्यक्तियों को निदेशक नियुक्त करके कंपनियां बनाईं। ईडी ने बताया कि कंपनियों के गठन के एक साल के भीतर ही इन कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रुपए मिले, जिन्हें कई फर्जी संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर किया गया था।
एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में एक अलग मामले में ईडी ने ठाणे, बारामती और नासिक में स्थित अस्पताल/आईवीएफ केंद्रों सहित 10 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया और मानव अंडाणु निकालने के रैकेट की जांच के दौरान डिजिटल सबूत और 29 लाख रुपए जब्त किए।
ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय-II ने 16 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 10 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।
ईडी ने एक बयान में कहा कि यह जांच महाराष्ट्र के ठाणे स्थित बदलापुर (पूर्व) पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर और उसके बाद दायर आरोपपत्र के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के अपराधों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
एजेंसी ने बताया कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क से संबंधित है जो आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मानव अंडाणु दान के लिए भर्ती करने और विभिन्न स्वामित्व वाली कंपनियों के तहत संचालित दाता-आपूर्ति एजेंटों के माध्यम से उन्हें विभिन्न आईवीएफ केंद्रों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) बैंकों को आपूर्ति करने में शामिल है।
--आईएएनएस
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