आईआईटी मद्रास और आईआईटी धारवाड़ में समझौता, शिक्षा-शोध और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
बेंगलुरु, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी मद्रास) और आईआईटी धारवाड़ ने गुरुवार को शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे।
दोनों संस्थानों को बधाई देते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह समझौता शैक्षणिक संसाधनों, अनुसंधान पहलों और नवाचार परियोजनाओं को साझा करने का रास्ता खोलेगा तथा आईआईटी संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आईआईटी मद्रास और आईआईटी धारवाड़ की यह साझेदारी अन्य आईआईटी संस्थानों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगी और भारत को ज्ञान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में योगदान देगी।
जोशी ने कहा कि यह समझौता उनके लिए विशेष रूप से संतोष का विषय है, क्योंकि धारवाड़ उनका लोकसभा क्षेत्र है।
उन्होंने कहा कि आईआईटी धारवाड़ उत्तर कर्नाटक के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा, "आईआईटी धारवाड़ अपेक्षाकृत नया आईआईटी है, लेकिन यह लगातार अपनी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईटी मद्रास जैसे अनुभवी और प्रतिष्ठित संस्थान के साथ साझेदारी से उत्तर कर्नाटक में शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
जोशी ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच हुआ यह समझौता केवल शुरुआत है और इसकी वास्तविक सफलता भविष्य में किए जाने वाले कार्यों से तय होगी।
उन्होंने दोनों संस्थानों को स्पष्ट लक्ष्य तय करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संस्थागत सहयोग देने की सलाह दी।
आईआईटी को देश के सबसे मजबूत ज्ञान केंद्रों में से एक बताते हुए जोशी ने कहा कि उनकी क्षमताएं केवल उनके परिसरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "ज्ञान बांटने से बढ़ता है। जब क्षमताएं एक साथ आती हैं तो अधिक अनुसंधान संभव होता है और जब संस्थान मिलकर काम करते हैं तो नवाचार को नई गति मिलती है।"
जोशी ने कहा कि आईआईटी मद्रास और आईआईटी धारवाड़ को अपनी-अपनी विशेषताओं को एक साथ लाकर महत्वाकांक्षी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करनी चाहिए, जिनमें शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी हो।
एमओयू के तहत दोनों संस्थानों के बीच फैकल्टी और छात्र आदान-प्रदान किया जाएगा। साथ ही प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, अनुसंधान उपकरणों और अन्य संस्थागत संसाधनों को साझा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे दोनों संस्थान उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
जोशी ने कहा कि शैक्षणिक प्रकाशनों और शोध रिपोर्टों का आदान-प्रदान ज्ञान साझा करने को और मजबूत बनाएगा। वहीं, संयुक्त कार्यशालाएं, सेमिनार, व्याख्यान और सम्मेलन शिक्षकों व छात्रों को नए विचारों और साझा रुचि के क्षेत्रों की पहचान करने का अवसर देंगे।
उन्होंने कहा कि आईआईटी मद्रास ने अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में एक मजबूत तंत्र विकसित किया है और आईआईटी धारवाड़ उसके अनुभवों से लाभ उठा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने पेटेंट, तकनीकी विकास, स्टार्टअप, उद्योग साझेदारी और सामाजिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए विचारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी न केवल दोनों संस्थानों को मजबूत करेगी, बल्कि उत्तर कर्नाटक के विकास और भारत को ज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
--आईएएनएस
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