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बैसाखी के पावन अवसर पर स्वर्ण मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, खालसा पंथ सजना दिवस धूमधाम से मनाया

चंडीगढ़, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। मंगलवार को पंजाब और हरियाणा भर के गुरुद्वारों में सैकड़ों श्रद्धालु बैसाखी मनाने के लिए उमड़ पड़े। बैसाखी सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, जो दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ (सिख संप्रदाय) की स्थापना के दिवस के रूप में मनाया जाता है।
 
बैसाखी के पावन अवसर पर स्वर्ण मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, खालसा पंथ सजना दिवस धूमधाम से मनाया

चंडीगढ़, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। मंगलवार को पंजाब और हरियाणा भर के गुरुद्वारों में सैकड़ों श्रद्धालु बैसाखी मनाने के लिए उमड़ पड़े। बैसाखी सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, जो दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ (सिख संप्रदाय) की स्थापना के दिवस के रूप में मनाया जाता है।

यह फसल कटाई के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है। अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर, जो सिख धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है, को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था, और बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही प्रार्थना करने के लिए वहां पहुंचे।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), जो पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के गुरुद्वारों का प्रबंधन करती है, ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टास्क फोर्स के कर्मचारियों को तैनात किया है।

पवित्र शहर आनंदपुर साहिब में स्थित तख्त केसगढ़ साहिब में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा, जहां 1699 में खालसा पंथ की स्थापना हुई थी।

कई लोग इस दिन को मनाने के लिए स्वर्ण मंदिर के सरोवर में पवित्र डुबकी लगाने को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। इस दिन को मनाने के लिए पूरे दिन चलने वाले लंगर (सामुदायिक रसोई) का आयोजन किया गया है।

स्वर्ण मंदिर के अलावा, लोगों ने पूरे पंजाब में स्थित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के सरोवरों में भी पवित्र डुबकी लगाई।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बैसाखी और खालसा पंथ के 'सजना दिवस' के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में मुख्यमंत्री मान ने कहा, 'दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा स्थापित खालसा पंथ, हमें हमेशा धर्म और सत्य की रक्षा करने तथा मानवता की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।'

यह दिन रबी की फसल के पकने का भी प्रतीक है, जो किसानों के लिए गेहूं की फसल काटने का समय होता है।

यह दिन 1919 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक मोड़ भी है, क्योंकि इसी दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में कई जाने-माने और गुमनाम शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

इस सप्ताह श्रद्धालुओं का एक जत्था अमृतसर से पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के लिए रवाना हुआ, ताकि वे खालसा सजना दिवस (बैसाखी) के अवसर पर आयोजित होने वाले धार्मिक समागम में शामिल हो सकें।

अपने शुभकामना संदेश में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, "विश्वास और उल्लास से भरा यह पवित्र त्योहार, जो हमारे किसानों के लिए समृद्धि और कल्याण का संदेश लेकर आया है, सभी के जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और उमंग का संचार करे—यही मेरी हार्दिक कामना है।"

--आईएएनएस

एससीएच