पाकिस्तान में 14 नवजातों की मौत ने उजागर की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली
नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल के नवजात शिशु वार्ड (नियोनेटल यूनिट) में लगी आग में 14 नवजातों की मौत ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को पाकिस्तान की आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों का प्रतीक बताया गया है।
इस्लामाबाद स्थित विदेश मामलों के पत्रकार फरहान बोखारी ने निक्केई एशिया में प्रकाशित अपने लेख “14 शिशुओं की मौत ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि से जुड़ी कड़वी सच्चाइयों को उजागर किया है” में इस त्रासदी को पाकिस्तान की वैश्विक छवि और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा विरोधाभास बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त को अस्पताल की नियोनेटल यूनिट में एयर कंडीशनिंग सिस्टम में खराबी के कारण आग लग गई। आग तेजी से उस वार्ड में फैल गई, जहां 15 नवजात इनक्यूबेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। हादसे में केवल एक शिशु जीवित बच सका, जबकि 14 की मौत हो गई।
लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान खुद को इस्लामी दुनिया का एकमात्र परमाणु संपन्न देश और अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में पेश करता है, लेकिन आर्थिक संकट के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
फरहान बोखारी के मुताबिक, इस घटना ने पाकिस्तान में वर्गीय असमानता को भी उजागर किया है। संपन्न वर्ग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाता है, जबकि आम लोग संसाधनों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
लेख में संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2026 में पाकिस्तान 168वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2016 में उसकी रैंकिंग 147वीं थी। इससे वह “निम्न मानव विकास” श्रेणी में शामिल हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक पाकिस्तान का बाहरी कर्ज 138.8 अरब डॉलर था। पिछले वित्त वर्ष में देश ने अपनी जीडीपी का लगभग 7 प्रतिशत कर्ज चुकाने में खर्च किया, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र पर 1 प्रतिशत से भी कम खर्च किया गया।
लेख में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान मोटरवे जैसी बड़ी बुनियादी परियोजनाओं पर निवेश जारी रखे हुए है, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है।
हादसे के बाद इस्लामाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे एक वरिष्ठ सिविल अधिकारी को सरकार ने पद से हटा दिया।
बोखारी ने लिखा कि पाकिस्तान में केवल लगभग 4 प्रतिशत आबादी कर चुकाती है, एक-तिहाई से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन बिता रहे हैं और रक्षा पर हर साल भारी खर्च किया जाता है। उनके अनुसार, यदि व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में भी इस तरह की त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं।
--आईएएनएस
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