अमेरिका : हिंदू समुदाय ने की जन्मजात नागरिकता के अधिकार को बनाए रखने की मांग
वाशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कई अन्य धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को बनाए रखने की अपील की है। संगठन का कहना है कि अगर इस संवैधानिक अधिकार को सीमित किया गया, तो इससे प्रवासी परिवारों में असुरक्षा बढ़ेगी और देश की धार्मिक विविधता पर भी असर पड़ सकता है।
मीडिया में जारी जानकारी के अनुसार, 26 फरवरी को हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने 57 धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर “ट्रंप बनाम बारबरा” नामक मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक एमिकस ब्रीफ दाखिल किया। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
यह फाइलिंग तब हुई जब इमिग्रेंट परिवारों ने जनवरी 2025 में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद चिंता जताई।
फाउंडेशन ने कहा कि संविधान यूनाइटेड स्टेट्स में पैदा हुए बच्चों के लिए साफ सुरक्षा देता है। संगठन के अनुसार, जनवरी 2025 से ही प्रवासी माता-पिता चिंतित महसूस कर रहे हैं क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की थी।
संगठन ने कहा कि अमेरिका के संविधान में साफ लिखा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चे उसी समय से नागरिक माने जाते हैं।
फाउंडेशन का कहना है कि यह मुद्दा केवल संविधान से जुड़ा नहीं है, बल्कि नैतिक और धार्मिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। हिंदू परंपरा में दूसरों का स्वागत करना और पूरी दुनिया को एक परिवार मानना सिखाया जाता है।
संगठन ने अपने बयान में कहा कि जन्म के आधार पर नागरिकता केवल संवैधानिक अधिकार ही नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म के अनुसार यह एक नैतिक जिम्मेदारी भी है कि हम दूसरों का स्वागत करें और पूरी दुनिया को एक परिवार मानें।
इस तर्क को समझाने के लिए संगठन ने हिंदू धर्मग्रंथों का भी उल्लेख किया। महा उपनिषद में कहा गया है कि संकीर्ण सोच वाले लोग किसी को अपना और किसी को पराया मानते हैं, लेकिन उदार विचार वाले लोगों के लिए पूरी दुनिया एक परिवार होती है।
इसी तरह तैत्तिरीय उपनिषद में भी शिक्षा दी गई है कि अतिथि को देवता के समान मानकर उसका सम्मान करना चाहिए।
फाउंडेशन का कहना है कि हिंदू समुदाय कई अन्य धार्मिक समुदायों के साथ मिलकर यह मानता है कि प्रवासियों और उनके परिवारों का स्वागत किया जाना चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
संगठन के अनुसार, अमेरिका आने वाले प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता की सुरक्षा मिलनी चाहिए ताकि उनके परिवार सुरक्षित महसूस कर सकें।
फाउंडेशन ने यह भी कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता अमेरिका में धार्मिक विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की सीनियर लीगल डायरेक्टर नीधी शाह ने कहा कि इस मुद्दे का सीधा असर उन इमिग्रेंट समुदायों पर पड़ता है जो एक नए देश में खुद को बसाने की कोशिश कर रहे हैं।
शाह ने कहा, "मैंने अपने समुदाय में अनगिनत परिवारों को एक नए देश में अपनी ज़िंदगी बसाने का मुश्किल रास्ता अपनाते देखा है, बच्चों को ऐसी जगह पर पालने की चुनौतियों का सामना करते देखा है जिसे वे अभी भी समझने की कोशिश कर रहे हैं, और अपनी धार्मिक परंपराओं को जारी रखने के लिए लड़ते देखा है।"
उन्होंने आगे कहा, "इन परिवारों को यहां आने और यहां रहने में सुरक्षित महसूस कराने के लिए जन्म से मिली नागरिकता ज़रूरी है।"
यह मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है जब अमेरिका में आव्रजन नीति और संविधान की नागरिकता से जुड़ी व्याख्या को लेकर व्यापक बहस चल रही है।
यह मुद्दा सिविल वॉर के बाद अपनाए गए 14वें अमेंडमेंट पर केंद्रित है, जिसमें कहा गया है कि यूनाइटेड स्टेट्स में जन्मे या वहां के नागरिक बने और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लोग देश के नागरिक हैं।
--आईएएनएस
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