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कलकत्ता हाईकोर्ट में ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न को लेकर एआईएसएफ की याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

कोलकाता, 28 सितंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
 

कोलकाता, 28 सितंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

एआईएसएफ ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पार्टी को मिला 'लिफाफा' चिह्न वापस लेकर नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पहले ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को दे दिया गया था।

जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रखते हुए चुनाव आयोग के निर्णय पर एक बार फिर नाराजगी जताई।

इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस राव ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने इस चुनाव चिह्न को किसी अन्य दल को देने के बजाय फ्रीज कर दिया होता, तो यह विवाद पैदा नहीं होता।

जस्टिस राव ने यह सवाल भी उठाया कि जब एआईएसएफ पिछले कुछ चुनावों में इसी चिह्न पर लड़ चुकी है, तो इसे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को देने का क्या आधार था।

उन्होंने कहा कि जब 'लिफाफा' उपलब्ध चुनाव चिह्नों में शामिल था और इसे पहले एक खास पार्टी को दिया जा चुका था, तो बाद में इसे दूसरी पार्टी को क्यों दिया गया?

हालांकि, चुनाव आयोग के वकील ने दलील दी कि किसी भी पार्टी को कोई स्वतंत्र चुनाव चिह्न दो बार से ज्यादा नहीं दिया जा सकता।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में एआईएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने यह याचिका दायर की है। उनका मुख्य सवाल है कि जब उन्होंने 2021 और 2026 में ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और दोनों बार जीत हासिल की, तो आयोग यह चिह्न किसी दूसरी पार्टी को कैसे दे सकता है।

इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और उसके 'जोड़ा फूल और घास' चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का फैसला किया था।

इसके बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया गया।

वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया।

चुनाव आयोग के फैसले से नाराज नौशाद सिद्दीकी ने इसे चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम