अगर अजित पवार जीवित होते तो एनसीपी के दोनों गुट एक हो जाते : सुनील तटकरे
मुंबई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने शुक्रवार को कहा कि अगर पूर्व पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजित पवार आज जीवित होते, तो एनसीपी के दोनों गुट एक हो चुके होते।
तटकरे ने कहा, "अजित पवार दादा के जीवित रहने के दौरान विलय को लेकर निश्चित रूप से चर्चा हुई थी। उन्होंने यह भी बताया था कि विलय किस तरह होगा। अगर अजित दादा यहां होते तो 12 फरवरी को विलय हो गया होता। यह अजित दादा की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाता। मैं उनके करीबी सहयोगियों में से एक था इसलिए मुझे इस मामले की जानकारी है।"
उन्होंने कहा, "28 जनवरी को एक दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया इसलिए यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।"
तटकरे ने शुक्रवार को फिर दोहराया कि दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी को प्रस्तावित था और यदि अजित पवार जीवित होते तो दोनों दल आज एकजुट दिखाई देते। अजित पवार की मृत्यु के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
हालांकि एनसीपी-एसपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने पहले कहा था कि चूंकि यह बातचीत सीधे अजित पवार के साथ हुई थी और अब वह हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए यह विषय लगभग समाप्त हो चुका है।
सुले ने यह भी कहा था कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर बातचीत हुई थी और यदि वह जीवित होते तो विलय हो भी सकता था।
तटकरे का यह बयान एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार की गुरुवार रात हुई मुलाकात के एक दिन बाद आया है। इस मुलाकात के बाद दोनों गुटों के विलय या फिर से साथ आने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया।
प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार के स्वास्थ्य का हालचाल जाना और उनसे राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने मुंबई के उस अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात की, जहां उन्हें बुधवार को भर्ती कराया गया था और उनका इलाज चल रहा है।
मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने पुष्टि की कि उनकी और शरद पवार की राजनीति पर भी बातचीत हुई, हालांकि उन्होंने बातचीत के विवरण साझा करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से शरद पवार का स्वास्थ्य जानने के लिए उनसे मिलने गए थे। पटेल ने कहा कि शरद पवार का स्वास्थ्य काफी अच्छा है।
उन्होंने कहा, "शरद पवार साहब को कुछ थकान महसूस हो रही थी, जिसके कारण वह पहले पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक गए थे और अब पूरी जांच के लिए ब्रीच कैंडी अस्पताल आए हैं।"
पटेल ने कहा, "शरद पवार साहब मुस्कुरा रहे थे और राजनीति में क्या चल रहा है, इसके बारे में पूछ रहे थे। उनका स्वास्थ्य फिलहाल बहुत अच्छा है। राजनीतिक मतभेद चाहे जो हों, हमारे व्यक्तिगत संबंध और स्नेह आज भी कायम हैं। हमारी राजनीतिक राहें अलग हो गई हैं, लेकिन पारिवारिक संबंधों के कारण मैं उनसे मिलता रहता हूं। उन्होंने देश, राज्य और यहां तक कि अमेरिका की राजनीति के बारे में भी सामान्य जानकारी ली।"
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को शरद पवार को फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी।
अस्पताल के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए शरद पवार के करीबी सहयोगी विट्ठल मणियार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वरिष्ठ नेता से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और आराम करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने शरद पवार से कहा, "सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे, आप अपनी सेहत का ध्यान रखिए और आराम कीजिए। आपका आशीर्वाद हम पर बना रहे।"
इस घटनाक्रम को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब एनसीपी के वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच बढ़ते तनाव के बीच पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने रविवार रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बताया गया कि उन्होंने सांसद पार्थ पवार की एकतरफा कार्यशैली को लेकर शिकायत की थी।
सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटे तथा सांसद पार्थ पवार को छोड़कर पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
खबरों के अनुसार, अमित शाह ने उन्हें संगठन को मजबूत करने की सलाह दी थी और कहा था कि एनसीपी संगठन की कमजोरी महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को नुकसान पहुंचा रही है।
इसके बाद प्रफुल्ल पटेल, मंत्री छगन भुजबल और पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने सोमवार को पार्टी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली कोर कमेटी को बैठक की जानकारी दी।
हालांकि एनसीपी ने दोनों गुटों के विलय या पुनर्मिलन की संभावना से इनकार किया है, लेकिन प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि वह 10 नवंबर के आसपास या उसके बाद एक बार फिर शरद पवार से मुलाकात कर सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 25 अक्टूबर को हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद साफ कहा था कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच कोई विलय नहीं होगा।
एनसीपी द्वारा विलय या संगठनात्मक नियंत्रण साझा करने से स्पष्ट इनकार को महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया है।
यह फैसला केवल सुलह की संभावना को खारिज नहीं करता, बल्कि पवार परिवार की राजनीतिक विरासत में स्थायी विभाजन को भी स्पष्ट करता है और राज्य की राजनीति में नए समीकरण स्थापित करता है।
दोनों गुटों के बीच सत्ता या संगठनात्मक नियंत्रण साझा करने से इनकार यह संकेत देता है कि रणनीतिक अस्पष्टता का दौर अब समाप्त हो चुका है। अब दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ते हुए पार्टी की मूल विरासत के लिए लंबे समय तक चुनावी मुकाबला करेंगे।
विलय या सत्ता साझेदारी की संभावना को खारिज करके सत्तारूढ़ एनसीपी गुट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन में अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।
चुनाव आयोग से आधिकारिक मान्यता और चुनाव चिह्न प्राप्त कर चुकी यह एनसीपी खुद को अस्थायी बागी गुट नहीं, बल्कि पार्टी के राजनीतिक और प्रशासनिक भविष्य का वैध उत्तराधिकारी साबित करना चाहती है।
संगठनात्मक स्वतंत्रता बनाए रखने से पार्टी को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी और सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी ताकत बरकरार रखने में मदद मिलेगी और वैचारिक कमजोर पड़ने का खतरा भी नहीं रहेगा।
--आईएएनएस
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