ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा, चुनाव आयोग में सुधार की मांग: सीपीआई (एम)
कोलकाता, 23 सितंबर (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो ने बुधवार को एक बयान जारी कर दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) से संबंधित एक मीडिया हाउस द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासों के बाद न केवल यह प्रक्रिया बल्कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बयान में आगे कहा गया कि ईसीआई में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
बयान में कहा गया कि इन खुलासों ने उन शंकाओं और चिंताओं को और भी पुख्ता कर दिया है जो सीबीआई (एम), अन्य विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों ने मतदाता सूची संशोधन और एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही उठाई थीं। रिपोर्टों से पता चलता है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची संशोधन और एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित कई निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। कानून के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्त समान हैं और किसी भी मतभेद का निपटारा बहुमत या सर्वसम्मति से होना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस नियम का पालन नहीं किया, बल्कि अपने सहयोगियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों की परवाह किए बिना अपने विचार थोप दिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मतभेद इस बारे में मूलभूत प्रश्नों से संबंधित हैं कि मतदाताओं को मतदाता सूची में कैसे जोड़ा या हटाया जा रहा है और एसआईआर को कैसे लागू किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने झूठा दावा किया था कि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है।
बयान में आगे कहा गया कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि पिछले कुछ महीनों में पूरी व्यवस्था इतनी केंद्रीकृत हो गई है कि यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तव में निर्णय कौन ले रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता और नोटिस जारी करने की ‘यांत्रिक’ प्रक्रिया पर चिंता जताई है।
सीपीआई (एम) नेतृत्व ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे एसआईआर प्रक्रिया से परे हैं और संस्थागत अखंडता, चुनाव आयोग के लोकतांत्रिक कामकाज, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, अत्यधिक केंद्रीकरण और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संरक्षण से संबंधित हैं।
पोलित ब्यूरो ने कहा कि एक निष्पक्ष संस्था के रूप में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर है। लोगों का एक भ्रष्ट चुनाव आयोग पर से विश्वास उठ गया है, जिसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वे अब अपने पद पर नहीं रह सकते।
एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग के अलावा, सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो ने कहा कि उसे चुनाव आयोग की अखंडता और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल करना चाहिए।
बयान में कहा गया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित कानून को रद्द करके और प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश से बनी चयन समिति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों को स्वीकार करते हुए एक नया कानून बनाना होगा।
--आईएएनएस
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