रेनवॉटर हार्वेस्टिंग में आगे बढ़ रहा गुवाहाटी एयरपोर्ट, जल संरक्षण को दिया जा रहा बढ़ावा
गुवाहाटी, 12 अगस्त (आईएएनएस)। गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय (एलजीबीआई) एयरपोर्ट ने अपनी वर्षा जल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) को और मजबूत किया है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि इस साल जुलाई में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल-2 में उपयोग किए गए कुल पानी का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल से पूरा किया गया।
यह पहल एयरपोर्ट की व्यापक स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य वर्षा जल के संग्रह, शोधन और पुन: उपयोग के जरिए एयरपोर्ट को जल-सकारात्मक (वॉटर पॉजिटिव) बनाना है।
अधिकारियों के अनुसार, गुवाहाटी में हर साल लगभग 1,800 से 2,200 मिमी बारिश होती है, जिससे वर्षा जल संचयन की बड़ी संभावना बनती है। इस वर्ष 9 अगस्त तक 1,320 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।
एयरपोर्ट पर वर्षा जल संग्रह के लिए दो बड़े टैंक बनाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,000 किलोलीटर है। एकत्रित पानी को एयरपोर्ट के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है और फिर विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है।
इस पानी का उपयोग पेयजल फाउंटेन, उपकरणों की सफाई और कूलिंग टावर जैसे कार्यों में किया जाता है। पीने योग्य उपयोग के लिए वर्षा जल को कई चरणों की शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है ताकि वह निर्धारित पेयजल मानकों पर खरा उतर सके।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बाहरी जल स्रोतों पर निर्भरता कम करना और वर्षा जल का अधिक प्रभावी उपयोग करना है, खासकर ऐसे समय में जब एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या और बुनियादी ढांचे का विस्तार लगातार बढ़ रहा है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एयरपोर्ट पर यात्री सुविधाओं, रखरखाव, कूलिंग सिस्टम और दैनिक संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। वर्षा जल के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक जल स्रोतों पर दबाव कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
एलजीबीआई एयरपोर्ट लंबे समय से संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली विभिन्न योजनाओं पर काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वर्षा जल संचयन की यह व्यवस्था अधिक टिकाऊ और मजबूत एयरपोर्ट पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गुवाहाटी में बढ़ते विमानन बुनियादी ढांचे की जल आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकेगा।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
