Aapka Rajasthan

गुजरात: गांजा तस्करी मामले में तीन लोग दोषी करार, 10 साल की सजा सुनाई गई

सूरत, 3 जुलाई (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने शुक्रवार को बताया कि सूरत की एक स्पेशल कोर्ट ने गांजा तस्करी के मामले में तीन लोगों को 10-10 साल की कड़ी सजा सुनाई है। इस मामले में 562 किलोग्राम से ज्यादा गांजा जब्त किया गया था।
 

सूरत, 3 जुलाई (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने शुक्रवार को बताया कि सूरत की एक स्पेशल कोर्ट ने गांजा तस्करी के मामले में तीन लोगों को 10-10 साल की कड़ी सजा सुनाई है। इस मामले में 562 किलोग्राम से ज्यादा गांजा जब्त किया गया था।

एनसीबी की अहमदाबाद जोनल यूनिट के अनुसार, यह मामला साल 2020 में 4 और 5 मई को चलाए गए एक ऑपरेशन से जुड़ा है। इस ऑपरेशन के दौरान, अधिकारियों ने पक्की और भरोसेमंद जानकारी के आधार पर सूरत के किम इलाके में कृष्णा इंडस्ट्री में तीन लोगों को पकड़ा।

इस ऑपरेशन के दौरान 562.55 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसे ओडिशा से गुजरात गैर-कानूनी तरीके से लाया गया था।

एजेंसी ने कहा कि जांच में यह पता चला है कि गैर-कानूनी बिक्री के लिए गांजे की कमर्शियल मात्रा को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने की एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची गई थी।

आरोपी के पास से यह प्रतिबंधित सामान बरामद किया गया, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। एनसीबी ने अक्टूबर 2020 में सूरत शहर की स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी।

सूरत शहर के 11वें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 जुलाई को अपना फैसला सुनाया।

दोषी ठहराए गए तीनों लोगों की पहचान ओडिशा के गंजाम जिले के कोडला के फासी इलाके के बिलिपारा निवासी कालू चरण बेहरा; गंजाम जिले के गंगापुर के मकरापोली निवासी सुधीर कुमार स्वैन और गंजाम जिले के ही जामुनी के बर्तुलु निवासी मिथुन प्रधान के तौर पर हुई।

अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 साल की कठोर सजा सुनाई। साथ ही, सभी पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

एनसीबी ने कहा कि जब्त किए गए नशीले पदार्थों को तय प्रक्रिया के अनुसार पहले ही प्री-ट्रायल आधार पर नष्ट कर दिया गया था।

एक बयान में एनसीबी ने कहा कि यह सजा ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने के प्रति एनसीबी के संकल्प को मजबूत करती है और यह सुनिश्चित करती है कि नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसपोर्ट चैनलों का इस्तेमाल करने वालों को कानून का पूरा सामना करना पड़े।

--आईएएनएस

पीएसके