गुजरात में राज्यव्यापी डीवर्मिंग अभियान के तहत 1.84 करोड़ बच्चों और किशोरों को दवा देने का लक्ष्य
गांधीनगर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। राज्य के 'राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस' अभियान के तहत गुजरात भर में 19 साल तक की उम्र के 1.84 करोड़ से ज्यादा बच्चों और किशोरों को डीवर्मिंग की दवा दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में पेट के कीड़ों की वजह से होने वाले एनीमिया (खून की कमी) को रोकना है।
'राष्ट्रीय डीवर्मिंग दिवस' का राज्य-स्तरीय कार्यक्रम गांधीनगर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया भी मौजूद थे।
मंत्री ने दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों को डीवर्मिंग की गोलियां बांटीं।
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पानशेरिया ने कहा कि राज्य ने 19 साल तक की उम्र के 1.84 करोड़ से ज्यादा बच्चों और किशोरों को डीवर्मिंग की दवा देने का लक्ष्य रखा था।
उन्होंने छात्रों से बातचीत भी की और उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अच्छी आदतें अपनाने, साफ-सफाई बनाए रखने और अपने माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित किया।
मंत्री ने स्कूल परिसर में एक पेड़ भी लगाया। स्वास्थ्य आयुक्त (ग्रामीण) डॉ. रतनकंवर गढ़वी चरण ने कहा कि यह अभियान 1 से 19 साल की उम्र के बच्चों में पेट के कीड़ों से होने वाले एनीमिया को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे थे कि राज्य में कोई भी बच्चा पेट के कीड़े मारने वाली दवा (डीवर्मिंग दवा) से वंचित न रहे।
इस मौके पर गांधीनगर की मेयर मीरा पटेल, चिल्ड्रन्स यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. जोशी, स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नयन जानी और सूचना विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. शैलेश परमार मौजूद थे।
कार्यक्रम में सीनियर अधिकारी, टीचिंग स्टाफ और छात्र भी शामिल हुए। मंत्री का यह बयान सूरत न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में हाई-लेवल जांच के आदेश देने के एक दिन बाद आया।
9 अगस्त को पानशेरिया ने अधिकारियों को रैगिंग, मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या लापरवाही की संभावना की जल्द जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
गांधीनगर में मेडिकल एजुकेशन के एडिशनल डायरेक्टर की सीधी देखरेख में सिविल हॉस्पिटल के डीन और सुपरिटेंडेंट संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं और साथ ही साथी छात्रों व रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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