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गुजरात में चांदीपुरा वायरस के 12 मामले पुष्ट, 8 की मौत, सरकार ने निगरानी बढ़ाई

गांधीनगर, 20 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में इस साल चांदीपुरा वायरस के 63 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 12 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 8 अन्य सैंपल की जांच जारी है। राज्य सरकार ने निगरानी, इलाज और वायरस फैलाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के उपाय तेज कर दिए हैं।
 

गांधीनगर, 20 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात में इस साल चांदीपुरा वायरस के 63 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 12 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 8 अन्य सैंपल की जांच जारी है। राज्य सरकार ने निगरानी, इलाज और वायरस फैलाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के उपाय तेज कर दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में राज्य की स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को संक्रमित मरीजों की यात्रा और बीमारी से जुड़ी जानकारी की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए, ताकि वायरस के संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, 63 संदिग्ध सैंपल में से अब तक 55 की जांच हो चुकी है। इनमें 12 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।

पुष्ट मामलों में 9 मरीज गुजरात के हैं, जबकि 3 मरीज पड़ोसी राज्य राजस्थान के हैं। 8 सैंपल की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। विभाग ने बताया कि 12 संक्रमित मरीजों में से 8 की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने जिलेवार जानकारी देते हुए बताया कि पंचमहल और खेड़ा जिले में दो-दो पुष्ट मामले सामने आए हैं। वहीं साबरकांठा, मेहसाणा, भरूच, भावनगर और अहमदाबाद नगर निगम क्षेत्र में एक-एक मामला दर्ज किया गया है।

मंत्री ने कहा, "किसी क्षेत्र में एक भी मामला सामने आने के बाद उस इलाके में गहन निगरानी जरूरी हो जाती है।"

उन्होंने अधिकारियों को मरीजों की यात्रा और बीमारी के इतिहास की विस्तार से जांच करने के निर्देश दिए, ताकि वायरस के फैलने के कारणों को समझा जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सभी 63 संदिग्ध मरीजों को मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल या मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है।

सभी संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भेजे जा रहे हैं। रैपिड रिस्पांस टीमें हर संदिग्ध मामले की जांच कर प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रही हैं।

राज्य सरकार ने वायरस को फैलाने वाले कीड़ों पर नियंत्रण के लिए धूल छिड़काव और दवाओं का छिड़काव शुरू किया है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में हजारों कच्चे और पक्के घरों में स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया है।

कच्चे घरों और पशु बाड़ों के आसपास रेत मक्खियों और अन्य कीड़ों को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर छिड़काव किया जा रहा है। इन्हीं कीड़ों के जरिए चांदीपुरा वायरस फैलने की संभावना मानी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों के सिविल अस्पतालों और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में बच्चों के लिए आईसीयू बेड, जरूरी दवाएं और वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सहयोग से गुजरात के 1,993 बाल रोग विशेषज्ञों को लगातार चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों के जरिए प्रशिक्षण दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक रेत मक्खियों के 117 सैंपल की जांच की गई है और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

चांदीपुरा वायरस की पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। यह वायरस मुख्य रूप से रेत मक्खियों के जरिए फैलता है और इसका असर ज्यादातर 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर होता है।

इस संक्रमण में अचानक तेज बुखार, उल्टी, दौरे पड़ना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया ने कहा कि यह वायरस आमतौर पर मानसून के मौसम और सितंबर तक ज्यादा सक्रिय रहता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में अचानक तेज बुखार, दौरे, उल्टी, दस्त या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो माता-पिता तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि बच्चों में बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराया जाए।

विभाग ने लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचने, पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और घर के आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी है, ताकि रेत मक्खियों के संपर्क को कम किया जा सके।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी