गुजरात के नवसारी में खाद वितरण के लिए मोबाइल ऐप का ट्रायल शुरू, किसानों को मिलेगी राहत
नवसारी, 24 जून (आईएएनएस)। गुजरात के नवसारी जिले में किसानों के लिए खाद वितरण को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए एक मोबाइल ऐप का ट्रायल किया जा रहा है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसान पहले से खाद बुक कर सकेंगे और सब्सिडी वाले खाद की उपलब्धता को ट्रैक भी कर सकेंगे। इसका उद्देश्य वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
यह फर्टिलाइजर सेल एप्लिकेशन सिस्टम कृषि मंत्रालय के तहत विकसित किया गया है और इसे नवसारी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। इसके तहत किसान अपने आधार विवरण से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, अपनी जमीन की जानकारी दर्ज कर सकते हैं और वास्तविक समय में उपलब्धता के आधार पर अधिकृत डीलरों से खाद खरीदने के लिए एक क्यूआर कोड प्राप्त कर सकते हैं।
जिले के किसानों ने बताया कि इस सिस्टम से उन्हें अब अलग-अलग दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।
नवसारी के किसान अशोक गांधी ने बताया कि वह अब अपनी जरूरत के अनुसार पहले से ऐप के जरिए खाद सुरक्षित कर लेते हैं। उन्होंने कहा, ''सरकार द्वारा बनाया गया यह ऐप किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। इससे खाद के उपयोग को भी नियंत्रित किया जा सकेगा और खेती आसान होगी। यह वास्तव में लाभकारी है।''
इस प्रणाली के तहत पंजीकरण के बाद किसान अपनी नजदीकी दुकानों पर खाद की उपलब्धता देख सकते हैं और अपना क्यूआर कोड दिखाकर खाद प्राप्त कर सकते हैं, जो उनकी पात्रता और बुकिंग विवरण से जुड़ा होता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला खाद सही लाभार्थियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे, साथ ही खुदरा केंद्रों पर भीड़ कम हो।
नवसारी के उप कृषि निदेशक पी.आर. कथीरिया ने कहा कि यह ऐप किसानों के लिए सुविधा बढ़ाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा, ''इससे किसान घर बैठे जान सकेंगे कि उनके आसपास किस दुकान पर खाद उपलब्ध है। उन्हें खाद के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और न ही कतारों में खड़ा होना पड़ेगा।''
अधिकारियों ने बताया कि यह डिजिटल प्रणाली खाद की उपलब्धता, मांग और वितरण की रियल-टाइम निगरानी भी करती है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था बेहतर और अधिक प्रभावी बनती है।
नवसारी में चल रहे इस पायलट प्रोजेक्ट पर नजर रखी जा रही है और यदि यह सफल रहता है तो इसे गुजरात के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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