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गुजरात: इंद्रोदा नेचर पार्क में लगाए गए 15 कूलर और 20 स्प्रिंकलर, 600 से ज्यादा जानवरों को गर्मी से मिल रही राहत

गांधीनगर, 29 मई (आईएएनएस)। गुजरात में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच गांधीनगर स्थित इंद्रोदा नेचर पार्क में वन्यजीवों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। वन विभाग ने पार्क में रहने वाले जानवरों के लिए कई राहत उपाय शुरू किए हैं।
 
गुजरात: इंद्रोदा नेचर पार्क में लगाए गए 15 कूलर और 20 स्प्रिंकलर, 600 से ज्यादा जानवरों को गर्मी से मिल रही राहत

गांधीनगर, 29 मई (आईएएनएस)। गुजरात में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच गांधीनगर स्थित इंद्रोदा नेचर पार्क में वन्यजीवों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। वन विभाग ने पार्क में रहने वाले जानवरों के लिए कई राहत उपाय शुरू किए हैं।

ये व्यवस्थाएं राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा की गई हैं। ये इंतजाम अप्रैल से लागू हैं और मानसून आने तक जारी रहेंगे।

गुजरात के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीटवेव जैसी स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

इंद्रोदा नेचर पार्क में इस समय 600 से ज्यादा जानवर हैं। इनमें तीन शेर, दो बाघ, तीन तेंदुए, मगरमच्छ, साही, कई प्रकार के सरीसृप और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं।

जानवरों के बाड़ों को ठंडा रखने के लिए मांसाहारी जानवरों और सरीसृप गृह में 15 बड़े एयर कूलर लगाए गए हैं। इन्हें दोपहर के सबसे गर्म समय में चलाया जाता है ताकि शरीर के अंदर का तापमान नियंत्रित रखा जा सके।

इसके अलावा पार्क के खुले हिस्सों में 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। ये दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक चलते हैं और पानी की फुहारों के जरिए आसपास का तापमान कम करने में मदद करते हैं।

पारंपरिक तरीके भी अपनाए गए हैं। इसके तहत खस लगाई गई हैं, जिन्हें लगातार पानी से गीला रखा जाता है। इससे गर्म हवा ठंडी होकर अंदर पहुंचती है। साथ ही धूप से बचाव के लिए एग्रो-नेट शेड भी लगाए गए हैं।

पार्क प्रबंधन के अनुसार, एयर कूलर, स्प्रिंकलर और प्राकृतिक छाया के संयुक्त इस्तेमाल से जानवरों के बाड़ों का तापमान बाहर की तुलना में करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम रखा जा रहा है। इससे एक नियंत्रित 'माइक्रोक्लाइमेट' तैयार हो रहा है।

गर्मी को देखते हुए पशु चिकित्सकों ने जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया है। मांसाहारी पशुओं का रोजाना भोजन 500 ग्राम से 1 किलो तक कम किया गया है ताकि गर्मी में पाचन पर ज्यादा दबाव न पड़े। शाकाहारी जानवरों और पक्षियों को तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे पानी से भरपूर फल दिए जा रहे हैं ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।

इसके अलावा शाकाहारी जानवरों के भोजन में विटामिन-सी आधारित ओआरएस और मल्टी-मिनरल विटामिन मिश्रण भी शामिल किए गए हैं ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बना रहे और गर्मी से होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो।

पार्क में खुले में घूमने वाले लंगूर, नीलगाय, मोर और साही जैसे जानवरों के लिए भी जंगल क्षेत्र में कई पानी के स्रोत बनाए गए हैं। इन्हें नियमित रूप से साफ और भरा जा रहा है ताकि गर्मी में जानवरों को लगातार पानी मिल सके।

जानवरों की सेहत पर नजर रखने और आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चिड़ियाघर के कर्मचारी और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं।

वन विभाग का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान जानवरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।

--आईएएनएस

एएमटी/एएस