गुजरात में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई, 1407 हॉस्टल और कैंटीन की जांच के बाद पांच लाइसेंस सस्पेंड
गांधीनगर, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात के अधिकारियों ने राज्यव्यापी खाद्य सुरक्षा अभियान के दौरान 1,407 हॉस्टल और कैंटीन का निरीक्षण किया। इस दौरान 328 प्रतिष्ठानों को सुधार के लिए नोटिस जारी किए गए, 459 जगहों से सैंपल लिए गए और पांच के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए। गुजरात सरकार ने मंगलवार को यह बताया।
फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीसीए) ने 14 से 28 सितंबर के बीच 259 सरकारी, 303 सेमी-सरकारी और 845 प्राइवेट हॉस्टल और कैंटीन में जांच की।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, इस अभियान के दौरान 16 जगहों ने खुद ही अपना कामकाज बंद कर दिया।
इन आंकड़ों की समीक्षा गांधीनगर में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में की गई। बैठक में नवरात्रि के दौरान और उसके बाद साफ-सुथरा, सुरक्षित और मिलावट-मुक्त भोजन उपलब्ध कराने के उपायों पर चर्चा की गई।
प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि नवरात्रि के दौरान पूरे राज्य में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन काम करेंगी, जो मिठाई, फरसान, दूध, घी और खाने की दूसरी चीजों की क्वालिटी की जांच करेंगी।
उन्होंने कहा, "ये वैन मौके पर ही सैंपल की जांच करेंगी और मिलावटी या घटिया खाना बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
मंत्री ने कहा कि फूड सेफ्टी को बेहतर बनाने का अभियान सिर्फ त्योहारों के मौसम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे साल चलना चाहिए। उन्होंने लोगों की सेहत की सुरक्षा और सुरक्षित भोजन तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने ग्राहकों से भी अपील की कि वे फूड सेफ्टी पर ध्यान दें और होटल व रेस्टोरेंट की रसोई की साफ-सफाई की जांच करें। उन्होंने कहा, "अगर कहीं भी साफ-सफाई की कमी दिखे तो गांधीनगर में फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।"
पन्शेरिया ने सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की टीमों की फूड सेफ्टी से जुड़े उनके लगातार काम के लिए खास तौर पर तारीफ की। समीक्षा बैठक में एफडीसीए कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
राज्य सरकार ने कहा कि इन जांचों और लगातार निगरानी का मकसद यह पक्का करना था कि हॉस्टल और कैंटीन में परोसा जाने वाला खाना साफ-सफाई के मानकों के मुताबिक हो और नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
--आईएएनएस
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