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गुजरात: साइबर धोखाधड़ी में 'ई-जीरो' एफआईआर से पीड़ितों को घर बैठे मिल रहा न्याय

गांधीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात सरकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत दर्ज करने की ई-जीरो एफआईआर प्रणाली से दोहरे लाभ मिल रहे हैं। पहला, इससे जांच में तेजी आई है, जिससे वित्तीय नुकसान को रोकने की संभावना बढ़ गई है और दूसरा, इससे पीड़ितों को उनके घर पर ही न्याय मिल रहा है।
 

गांधीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात सरकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत दर्ज करने की ई-जीरो एफआईआर प्रणाली से दोहरे लाभ मिल रहे हैं। पहला, इससे जांच में तेजी आई है, जिससे वित्तीय नुकसान को रोकने की संभावना बढ़ गई है और दूसरा, इससे पीड़ितों को उनके घर पर ही न्याय मिल रहा है।

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को निवासियों के बीच व्यापक स्वीकृति और समर्थन मिल रहा है, क्योंकि अधिक से अधिक लोग वित्तीय अपराधों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने के लिए इस माध्यम का उपयोग कर रहे हैं।

आज के डिजिटल युग में साइबर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती धोखेबाजों का पता लगाना है, क्योंकि उनका कोई निश्चित ठिकाना नहीं होता और वे चलते-फिरते ही आपराधिक धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।

ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों की समस्याओं को दूर करने के लिए गुजरात पुलिस साइबर सेल ने हाल ही में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से 'साइबर वित्तीय धोखाधड़ी ई-जीरो एफआईआर' दर्ज करने की प्रणाली शुरू की है।

इस ई-जीरो एफआईआर प्रक्रिया के माध्यम से अब पूरे राज्य में मामले दर्ज किए जा रहे हैं और पीड़ितों से ठगी गई धनराशि बरामद की जा रही है।

अहमदाबाद के एक साइबर धोखाधड़ी पीड़ित ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि हम साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए, जिसमें हमारे बैंक खाते से 2.30 करोड़ रुपए दूसरे फंड में ट्रांसफर कर दिए गए। हमने घटना की सूचना साइबर अपराध इकाई को दी और उनकी सहायता से हमने 1.63 करोड़ रुपए वापस प्राप्त कर लिए।

नई शिकायत निवारण प्रणाली के तहत, पुलिस 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी की ई-जीरो एफआईआर दर्ज करती है और उसे संबंधित पुलिस स्टेशन को भेज देती है। इसके बाद, पुलिस पीड़ित से संपर्क करती है और धोखाधड़ी वाले लेनदेन में शामिल बैंक के साथ जांच शुरू करती है।

साइबर विशेषज्ञों का सुझाव है कि नागरिकों को न केवल वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहना चाहिए, बल्कि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को भी 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत देनी चाहिए।

गुजरात पुलिस की इस पहल से साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को अपार राहत मिली है। अब उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए बार-बार पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एफआईआर अब घर बैठे ही दर्ज कराई जा सकती है।

इससे पीड़ितों को मानसिक तनाव और डिजिटल धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने के लिए इधर-उधर भागदौड़ करने की परेशानी से मुक्ति मिली है।

--आईएएनएस

एमएस/