केंद्र ने ईपीएफ पर वित्त वर्ष 26 के लिए 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को दी मंजूरी, 7 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर को होगा फायदा
नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर वित्त वर्ष 26 के लिए 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। इससे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में योगदान देने वाले 7 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स को फायदा होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईपीएफओ की निर्णय लेने वाली इकाई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्ट (सीबीटी) द्वारा 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
ईपीएफ पर ब्याज दर इस महीने के आखिर में क्रेडिट हो सकती है।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता वाली सीबीटी ने 2 मार्च, 2026 को वित्त वर्ष 2026 के लिए ईपीएफ पर ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया था।
यह लगातार तीसरा साल है जब रिटायरमेंट फंड बॉडी ने अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है।
सीबीटी के फैसले के बाद, मंजूरी के लिए प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा गया था, क्योंकि सरकार ईपीएफ जमा राशि की गारंटी देती है।
मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद, अब ईपीएफओ सदस्यों के खातों में ब्याज जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है, जब सरकारी संस्था अपने आने वाले ईपीएफओ 3.0 प्लेटफॉर्म के तहत बड़े डिजिटल सुधार लागू करने की तैयारी कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईपीएफओ एक ऐसी सुविधा शुरू करेगी जिससे सब्सक्राइबर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ऐप्स और ईपीएफ से जुड़े खाते के एटीएम के जरिए प्रोविडेंट फंड का पैसा निकाल सकेंगे।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर तैयार की जा रही इस नई सुविधा को जल्द ही लॉन्च किए जाने की संभावना है।
इस सिस्टम की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसके शुरू होने के बारे में जल्द ही आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।
प्रस्तावित सिस्टम के तहत, सब्सक्राइबर यूपीआई-इनेबल्ड प्लेटफॉर्म और एमटीएम एक्सेस का इस्तेमाल करके अपने ईपीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक हिस्सा सीधे अपने बैंक अकाउंट में तुरंत निकाल सकेंगे।
जानकारों का मानना है कि इस कदम से कागजी कार्रवाई और प्रोसेसिंग में होने वाली देरी काफी कम हो जाएगी, साथ ही पीएफ निकासी में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बेहतर होगी।
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