सरकार को वाटर सप्लाई के लिए सिस्टम बनाने और रखरखाव करने की जरूरत : सीजेआई
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि सरकार को ऐसी प्रणालियां बनानी और बनाए रखनी चाहिए जिसके माध्यम से पानी लोगों तक पहुंचे।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, सीजेआई ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ बुनियादी ढांचा मुहैया कराने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पानी सुरक्षित और भरोसेमंद हो और जब भी लोगों को जरूरत हो, उन्हें मिल सके।
सीजेआई कांत ने कहा कि सरकार को ऐसे सिस्टम बनाने और उन्हें बनाए रखने चाहिए जिनसे लोगों तक पानी पहुंच सके। उन्होंने पानी तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक समन्वित संस्थागत प्रतिक्रिया की जरूरत पर जोर दिया।
मानवाधिकार के नजरिए से पानी के महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य को बनाए रखता है, शिक्षा को संभव बनाता है, गरिमा की रक्षा करता है और उन स्थितियों को आकार देता है जिनमें परिवार रहते और काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के पास पानी तक भरोसेमंद पहुंच नहीं है, वह उस गरिमा का पूरा आनंद नहीं ले सकता जिसका वादा हमारा संविधान करता है। पानी कोई अलग-थलग अधिकार नहीं है बल्कि अन्य अधिकारों को पूरा करने के लिए जरूरी शर्तों में से एक है। भरोसेमंद पानी तक पहुंच न होने के व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिणाम होते हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो पानी लाने में घंटों बिताती हैं और उन किसानों के लिए जिनकी आजीविका सिंचाई पर निर्भर करती है।
भारत में पीने के पानी तक पहुंच के विस्तार का जिक्र करते हुए, जिसमें ग्रामीण इलाकों में घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस प्रगति की तारीफ होनी चाहिए लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब ध्यान सप्लाई की गुणवत्ता पर भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ नल होना पानी तक पहुंच के बराबर नहीं है। आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य हानिकारक पदार्थों से दूषित पानी जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। जीवन के अधिकार की संवैधानिक समझ अब गरिमापूर्ण जीवन के लिए जरूरी स्थितियों को भी शामिल करने के लिए विकसित हुई है, जिसमें स्वास्थ्य, भोजन, आवास, आजीविका और स्वच्छ पर्यावरण तक पहुंच शामिल है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पर्यावरण संबंधी कानूनों ने माना है कि जीवन के अधिकार में प्रदूषणमुक्त पानी और हवा का आनंद लेने का अधिकार भी शामिल है, जिससे सुरक्षित पानी तक पहुंच सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारियों का एक महत्वपूर्ण पहलू बन जाती है।
सीजेआई कांत ने जमीनी हकीकत को उजागर करने में नागरिक समाज की भूमिका और पानी से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, अनुभव और सहयोग के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के योगदान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी हमें एक अहम बात सिखाता है, यह सीमाओं को पार करता है। पानी तक पहुंच पक्की करने के लिए हमारा तरीका भी ऐसा ही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पानी के अधिकार को सिर्फ वर्तमान के हक के तौर पर नहीं बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी स्थितियां बनाए रखना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां सम्मान के साथ अपने अधिकारों का आनंद ले सकें।
--आईएएनएस
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