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डॉलर में मजबूती के चलते हफ्ते भर में सोने का रेट 1.15 प्रतिशत गिरा, तो चांदी 2.88 प्रतिशत फिसली

मुंबई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में सोने की मांग पर दबाव बना रहा, जिससे इस सप्ताह सोने की कीमतों में 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
 

मुंबई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में सोने की मांग पर दबाव बना रहा, जिससे इस सप्ताह सोने की कीमतों में 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

शुक्रवार को एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा 1.13 प्रतिशत गिर गई। कारोबार के दौरान सोना वायदा 1,41,599 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी वायदा 2,17,488 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 999 प्यूरिटी वाले सोने के 10 ग्राम का भाव 1,42,860 रुपए रहा, जो सोमवार को बाजार खुलने के समय 1,44,532 रुपए था। यानी हफ्ते भर के दौरान सोने की कीमतों में 1,672 रुपए यानी 1.15 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

वहीं सिल्वर की बात करें, तो आईबीजेए के मुताबिक, बीते शुक्रवार को 999 प्यूरिटी वाली चांदी का रेट 2,18,295 रुपए प्रति किलोग्राम था, जो सोमवार को बाजार खुलने के समय 2,24,771 रुपए था। यानी एक हफ्ते में चांदी का भाव 6,476 रुपए यानी 2.88 प्रतिशत गिर गया।

सप्ताह भर सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव बना रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बाद सोने में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई थी। इसके बाद सप्ताह के अंत में डॉलर कमजोर पड़ने से गुरुवार तक सोने ने अपनी बढ़त को और बढ़ाया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी अपेक्षाकृत सीमित दायरे में कारोबार करती रही, जबकि निवेशक फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति और नए वैश्विक आर्थिक संकेतों का इंतजार करते रहे। इसी वजह से कीमती धातुओं के बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह कमोडिटी बाजार में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई बार कम होने और फिर बढ़ने की स्थिति में रहा। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को मजबूती दी, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों जैसे सोने की मांग प्रभावित हुई।

फेडरल रिजर्व के अपेक्षाकृत सख्त रुख, मजबूत श्रम बाजार और तेल कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से बढ़ी महंगाई की आशंकाओं के कारण निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है। बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना लगभग 63 प्रतिशत मान रहा है।

इधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को रोके जाने और हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी के बाद सऊदी अरब द्वारा लाल सागर में समुद्री सुरक्षा के लिए 43 देशों का गठबंधन बनाने की पहल ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम होता है तो ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा, वैश्विक निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान सुधरेगा और इससे सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं को भी अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

तकनीकी स्तर पर कॉमेक्स पर सोने के लिए तत्काल 4,160-4,180 डॉलर प्रति औंस का स्तर प्रमुख प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 4,090-4,070 डॉलर का स्तर मजबूत समर्थन है।

वहीं, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,44,000-1,44,300 रुपए का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस और 1,43,000-1,43,300 रुपए का स्तर प्रमुख सपोर्ट माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई और रोजगार संबंधी आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और यूएस डॉलर इंडेक्स की चाल पर रहेगी। यही कारक आगे सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी