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गोवा में अवैध पेट्रोलियम भंडारण केंद्र पर क्राइम ब्रांच की छापेमारी, 1.5 करोड़ रुपये का ईंधन और टैंकर जब्त

पणजी, 28 जून (आईएएनएस)। गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार को अवैध रूप से संचालित पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण केंद्र पर छापेमारी कर करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के ईंधन टैंकर और पेट्रोलियम उत्पाद जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष सूचना के आधार पर की गई।
 

पणजी, 28 जून (आईएएनएस)। गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार को अवैध रूप से संचालित पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण केंद्र पर छापेमारी कर करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के ईंधन टैंकर और पेट्रोलियम उत्पाद जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष सूचना के आधार पर की गई।

क्राइम ब्रांच की टीम ने डाबोलिम क्षेत्र में स्थित परिसर पर करीब छह घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान छह ईंधन टैंकरों और एक टिपर ट्रक की जांच की गई।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि संबंधित परिसर में बिना किसी वैध लाइसेंस के बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का भंडारण किया जा रहा था, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।

जांच के दौरान टैंकरों में ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थ भरा मिला। पुलिस ने उसके नमूने एकत्र कर उन्हें सील कर आगे की जांच के लिए सुरक्षित रख लिया। सभी टैंकर, टिपर ट्रक और अन्य साक्ष्य भी जब्त कर लिए गए।

पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए वाहनों और पेट्रोलियम उत्पादों की कुल अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है।

यह कार्रवाई फॉरेंसिक विशेषज्ञों और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के अधिकारियों की मौजूदगी में की गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह परिसर और जब्त वाहन गोवा के सांक्वेलिम निवासी देवेंद्र नाइक उर्फ राजू चव्हाण द्वारा संचालित किए जा रहे थे।

जांच में यह भी पता चला कि यहां संग्रहित पेट्रोलियम उत्पादों को कथित तौर पर ऊंचे दामों पर काला बाज़ार में बेचा जा रहा था।

तेल विशेषज्ञों के अनुसार, इस परिसर में पेट्रोलियम उत्पादों का अवैध भंडारण और रखरखाव पेट्रोलियम अधिनियम, 1934, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन है। साथ ही इससे सार्वजनिक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 287, पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 की धारा 23, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 8 और 15 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

--आईएएनएस

डीएससी