पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता की तेजी से बिगड़ती स्थिति पर वैश्विक संगठनों ने जताई चिंता
न्यूयॉर्क, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कई अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर देश में तेजी से बिगड़ते प्रेस स्वतंत्रता के माहौल पर गंभीर चिंता व्यक्त की। संगठनों ने चेतावनी दी कि पत्रकारों पर बढ़ते प्रतिबंध और कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संगठनों ने कहा कि हाल के महीनों में पाकिस्तान में कई पत्रकार लापता हुए हैं, हिरासत में लिए गए हैं, उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की गई है, उन्हें देश के कुछ हिस्सों में रिपोर्टिंग करने से रोका गया है और सरकारी व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दबाव के कारण कई पत्रकारों को अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी है।
पत्र में कहा गया कि इन घटनाक्रमों ने पाकिस्तानी पत्रकारों की स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से रिपोर्टिंग करने की क्षमता को और कमजोर कर दिया है।
संगठनों ने पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम, 2016 के बढ़ते उपयोग और नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ की जा रही जांचों को चिंताजनक बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाए हैं, इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं को बंद किया है तथा प्रसारण संस्थानों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई भी की है।
संगठनों ने फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026 को भी "कठोर" बताया। इन दिशानिर्देशों के तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची से बाहर रिपोर्टिंग करने से पहले सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
पत्र में कहा गया, "सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने या कथित झूठी सूचनाओं को रोकने जैसे कारण सार्वजनिक हित की रिपोर्टिंग को दबाने का खुला आधार नहीं बन सकते।"
मानवाधिकार समूहों ने पाकिस्तान सरकार से हिरासत में लिए गए पत्रकार राजी ताहिर और मुहम्मद सैफ को रिहा करने की मांग भी की है।
संगठनों के अनुसार, दोनों स्वतंत्र पत्रकार 1 अगस्त को कथित रूप से हिरासत में लिए गए और उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इस्लामाबाद पुलिस ने उनकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और उनका वर्तमान ठिकाना अब भी अज्ञात है।
पत्र में कहा गया कि दोनों पत्रकारों के गायब होने की परिस्थितियां विधिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें कानूनी सहायता मिले और वे अपने परिवारों से संपर्क कर सकें।
संगठनों ने सरकार से मांग की कि पत्रकारों के गायब होने की घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए, गैरकानूनी हिरासत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पत्रकारों के सभी कानूनी अधिकारों की रक्षा की जाए।
उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026 को वापस लेने और पत्रकारिता को अपराध की तरह पेश करने के लिए पीईसीए तथा एनसीसीआईए जांचों के इस्तेमाल को बंद करने की भी अपील की।
--आईएएनएस
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