Aapka Rajasthan

सिंधु जल संधि पर भारत का फैसला पाकिस्तान की जनता नहीं, आतंकवाद के खिलाफ: रिपोर्ट

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सराकर ने पाकिस्तान के सख्त कदत उठाते हुए सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को फिलहाल लागू न रखने का फैसला किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम पाकिस्तान की आम जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि वह आतंकवाद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती है।
 

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सराकर ने पाक‍िस्‍तान के सख्‍त कदत उठाते हुए सिंधु जल संधि (आईडब्‍ल्‍यूटी) को फिलहाल लागू न रखने का फैसला किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम पाकिस्तान की आम जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि वह आतंकवाद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की नीतियों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है। इसका असर सिर्फ भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और उससे आगे तक महसूस किया जा सकता है।

'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान और गैर-कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल करता रहा है। साथ ही, सीमा पार आतंकवाद को उसका लगातार समर्थन और बार-बार की सैन्य आक्रामकता ने सिंधु जल संधि की भावना को कमजोर किया है।

हाल ही में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मसूद मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "जो भी हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।"

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता (डीजी आईएसपीआर) लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कथित तौर पर कहा, "अगर आप हमारा पानी रोकेंगे, तो हम आपकी सांसें रोक देंगे।" इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के प्रमुख और आतंकवादी हाफिज सईद ने कहा था, "अगर तुम पानी रोकोगे, तो हम तुम्हारी सांसें रोक देंगे और इन नदियों में खून बहेगा।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1960 में जब सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, तब हालात आज से बिल्कुल अलग थे। पाकिस्तान अक्सर इस समझौते को दोनों देशों के बीच सीमा पार नदी सहयोग का सबसे अच्छा उदाहरण बताता है। लेकिन यह संधि इतने वर्षों तक इसलिए चलती रही क्योंकि भारत ने हर परिस्थिति में ईमानदारी से इसका पालन किया और बेहद उदार रुख अपनाया। यह तब भी जारी रहा जब पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्ध भारत पर थोपे और लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस संधि के तहत इतनी उदारता दिखाई कि उसे खुद भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसमें कहा गया है कि यह दुनिया का एक अनोखा उदाहरण है, जहां ऊपरी धारा वाला देश होने के बावजूद भारत ने अपनी इच्छा से छह नदियों के पानी का चार गुना से भी ज्यादा हिस्सा निचली धारा वाले पाकिस्तान को दे दिया। इतना ही नहीं, भारत ने अपने ही पानी के इस्तेमाल पर कई सख्त सीमाएं भी स्वीकार कीं। यह सब अच्छे पड़ोसी संबंधों की उम्मीद में किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के कुल पानी का लगभग 80.52 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान को मिलता है, जबकि ऊपरी धारा वाला देश होने और नदी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भारत में होने के बावजूद भारत को सिर्फ 19.48 प्रतिशत पानी ही मिला है।

रिपोर्ट का कहना है कि इसकी वजह से भारत को आर्थिक विकास, कृषि, जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई क्षेत्रों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद, खासकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने सिंधु जल संधि के भविष्य को आतंकवाद के मुद्दे से जोड़ दिया है। अब इस संधि को फिर से लागू करना इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद करे।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस संधि को रद्द या निलंबित नहीं किया है, बल्कि इसे फिलहाल लागू न रखने का फैसला किया है। यानी अगर पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद कर देता है, तो भविष्य में इस संधि को फिर से लागू किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी