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अरूप बिस्वास ने टीएमसी के फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए, कहा- उन्हें अंधेरे में रखा गया

कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने उनके खिलाफ जारी 'कारण बताओ नोटिस' (शो-कॉज नोटिस) का जवाब दे दिया है। पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कराए जाने के संबंध में जारी इस नोटिस के जवाब में बिस्वास ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया है कि फंड के इस्तेमाल को लेकर उन्हें हमेशा अंधेरे में रखा गया।
 
अरूप बिस्वास ने टीएमसी के फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए, कहा- उन्हें अंधेरे में रखा गया

कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने उनके खिलाफ जारी 'कारण बताओ नोटिस' (शो-कॉज नोटिस) का जवाब दे दिया है। पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कराए जाने के संबंध में जारी इस नोटिस के जवाब में बिस्वास ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया है कि फंड के इस्तेमाल को लेकर उन्हें हमेशा अंधेरे में रखा गया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिस्वास ने कोषाध्यक्ष के तौर पर एक प्राइवेट बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के तीन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया। यह कदम पार्टी के भीतर हुए झगड़े के बाद पार्टी फंड पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया था।

चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा की और बताया कि पार्टी के पूर्व सांसद सुभाषिश चक्रवर्ती ने अरूप बिस्वास की जगह नया कोषाध्यक्ष पद संभाला है। हालांकि, हाल ही में सामने आए बैंक को लिखे पत्र में अरूप ने दावा किया है कि वह अभी भी पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं।

तृणमूल कांग्रेस के कोलकाता के एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में कई खाते हैं। उनके आधिकारिक पत्र के आधार पर उन खातों में लेनदेन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पार्टी में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद पार्टी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

शो-कॉज़ नोटिस के जवाब में अरूप बिस्वास ने जो तीन पेज की चिट्ठी भेजी, उसमें उन्होंने पार्टी के अंदरूनी लेन-देन के इतिहास के बारे में कई सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने दावा किया कि भले ही वह पार्टी के कोषाध्यक्ष के तौर पर बही-खाते का काम संभाल रहे थे, लेकिन असल में सारे वित्तीय लेन-देन उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखकर किए जाते थे।

खुद लिखे गए पत्र में टॉलीगंज के पूर्व विधायक ने साफ़ किया कि भले ही उनसे पार्टी की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई चेक पर दस्तखत करवाए गए। लेकिन, उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल कहां हुआ। कोषाध्यक्ष होने के बावजूद उनके पास इस बात की कोई साफ जानकारी या सबूत नहीं है कि पैसे किसने निकाले और कहां खर्च किए।

बिस्वास ने कुछ लेन-देन में गंभीर अनियमितताओं का भी आरोप लगाया, जिनमें उनके हस्ताक्षर वाले चेक से जुड़े मामले भी शामिल हैं। पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच बिस्वास ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वह तृणमूल कांग्रेस के साथ बने हुए हैं और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी का समर्थन करते हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों में अभी लगभग 534 करोड़ रुपये हैं। विधानसभा में रितब्रता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी के भीतर एक बागी गुट के उभरने के बाद इन फंड पर कानूनी दावा करने की कोशिश की गईं।

इस बात के डर से कि नया गुट इस फंड पर कब्ज़ा कर सकता है, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कथित तौर पर अरूप बिस्वास को निर्देश दिया कि वे सारा पैसा अस्थायी रूप से किसी ऐसे दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दें जो पार्टी का न हो।

सूत्रों के मुताबिक, बागी तृणमूल विधायकों को जब इस मामले का पता चला, तो उन्होंने कथित तौर पर अरूप बिस्वास पर भारी दबाव डाला और उन्हें सख्त निर्देश दिया कि वे तुरंत बैंक को पत्र लिखकर खाते में सभी लेनदेन रोकने का आधिकारिक अनुरोध करें। नतीजतन, पार्टी के जमा पैसे को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व राज्य मंत्री ने खाते को फ्रीज करने के लिए पत्र भेजा।

इस विवाद के बीच पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए, जिनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा थे।

इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी ने बिस्वास से बातचीत की है और इस मामले को पार्टी का अंदरूनी मामला बताया है।

--आईएएनएस

एसएचके/एएस