तमिलनाडु वन विभाग ने नीलाकुरिंजी फूल खिलने वाली जगह पर लोगों के जाने पर लगाई रोक
नीलगिरि, 28 जुलाई (आईएएनएस)। गुडालुर इलाके के कुछ हिस्सों में दुर्लभ नीलाकुरिंजी फूल के शानदार तरीके से खिलने की वजह से पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों सैलानी वहां पहुंचे हैं। इसे देखते हुए तमिलनाडु वन विभाग ने इन फूलों वाली जगहों पर लोगों के जाने पर रोक लगा दी है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जिन इलाकों में ये फूल खिले हैं, वे पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील हैं और वहां जंगली हाथी आते-जाते रहते हैं। इसलिए, वहां बिना रोक-टोक घूमना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह और खतरनाक हो सकता है।
नीलाकुरिंजी (स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना) एक ऐसी झाड़ी है, जिसमें फूल हर 12 साल में सिर्फ एक बार खिलते हैं। यह नाडुक्कानी, गुडालूर, ऊसिमलाई और ओ-वैली जैसी कई जगहों पर खिला है। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इस दुर्लभ प्राकृतिक घटना ने अपनी ओर खींचा है। इनमें से कई लोग बैंगनी-नीले फूलों की तस्वीरें, सेल्फी और वीडियो लेने के लिए इस इलाके में आ रहे हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि अचानक पर्यटकों की भीड़ बढ़ने से लोगों और जंगली जानवरों, दोनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
फूलों वाले ये इलाके उन जंगलों के अंदर या उनके पास हैं, जो हाथियों और दूसरे जंगली जानवरों के लिए जरूरी रहने की जगह और आने-जाने का रास्ता (कॉरिडोर) हैं। अधिकारियों का कहना है कि इंसानों की बढ़ती मौजूदगी से जंगली जानवर परेशान हो सकते हैं, नाजुक इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है और इंसान-जानवर के आमना-सामना होने का खतरा बढ़ सकता है।
नादुकानी फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर रवि ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2023 में नीलकुरिंजी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची तृतीय में शामिल किया, जिससे इस पौधे को कानूनी सुरक्षा मिली।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई फूल तोड़ते या पौधों को नुकसान पहुंचाते हुए पाया जाता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, 25,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि गुडालुर तमिलनाडु में इंसानों और हाथियों के बीच टकराव वाले प्रमुख इलाकों में से एक है और जहाँ ये फूल खिलते हैं, वे इलाके हाथियों के झुंडों के आने-जाने के रास्ते में पड़ते हैं।
पिछले कुछ दिनों में बार-बार मौखिक चेतावनी दिए जाने के बावजूद कई लोग प्रतिबंधित इलाकों में जाते रहे, जिससे विभाग को नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए सख़्त कदम उठाने पड़े।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नीलकुरिंजी के खिलने वाली जगहों पर जाने से बचें और इस इलाके के पारिस्थितिक महत्व का सम्मान करें। विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से यह भी आग्रह किया है कि वे बिना अनुमति घुसने, फूल तोड़ने या संरक्षित पौधों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी घटना की सूचना गुडालुर वन प्रभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-4353 पर दें।
--आईएएनएस
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